श्श्श्श्श्..! आपका बेबी भी सुन रहा है आपकी बातें

बहुत इस महिलाएं, अपनी प्रेग्नेंट बेली से बात करने की आदि हो जाती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं, कि आपका अपना बेबी भी सेकेण्ड ट्राइमेस्टर में, आपकी बातों को सुनना शुरू कर देता है। बच्चा बाहर से आने वाली सभी आवाजों को सुनना और महसूस करना शुरू कर देता है।

दूसरे ट्राइमेस्टर में, बच्चा बाहर से आने वाली आवाजों जैसे- धुन और शोर सभी को सुन सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं उसे इन सभी आवाजों से, पैदा होने के बाद बाहर के माहौल में सामंजस्य बैठाने में भी मदद मिलती है। साथ ही जितनी तेज आवाज़ बाहर से बच्चे तक पहुंच सकती है, बच्चा भी उस पर उसी तरह से प्रतिक्रिया देता है। कई प्रेग्नेंट महिलाओं ने तो महसूस भी किया होगा कि यदि उनके आस-पास तेज म्यूजिक बजता है, तो उन्हें अंदर मूवमेंट महसूस होनी शुरू हो जाती है।

एक और मजेदार बात

अभी हमने कहा कि किसी भी महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा बाहर की आवाजों को सुन सकता है, लेकिन क्या आप जानती हैं कि इनमें भी वह सबसे ज्यादा साफ़ आवाज जो सुन सकता है और महसूस कर सकता है, वह है उसकी अपनी माँ की आवाज।

ऐसा इसलिए क्योंकि जब एक प्रेग्नेंट लड़ी बोलती है, तो उसकी आवाज उसके पूरे शरीर को वाइब्रेट कर देती है। अध्ययनों में सामने आया है कि जब एक महिला बोलती है, तो उसके बच्चे की हार्टबीट बढ़ जाती है। यानी जब आप बोलती हैं, तो आपका बच्चा और भी ज्यादा अलर्ट हो जाता है। इसलिए जोर से बोलकर पढ़ना, गाने गाना, बच्चे के साथ बाते करना यह सभी आपके बच्चे तक पहुंचता है और वह आपको अनायास ही पहचानना शुरू कर देता है।

हे हेलो, कहीं बेबे के पापा यह तो नहीं समझ रहे कि उनके साथ नाइंसाफी हो रही है। अरे! आप भी अपना इंट्रोकशन दीजिये ना अपने बेबी को। वह आपको भी सुनेगा। खोजों में यह बात सामने आई है कि बेबी जिन आवाजों और बातों को रोज़-रोज़ सुनता है, वह भी उनका आदि हो जाता है। यह बात ख़ास तौर पर, तीसरे ट्राइमेस्टर के बेबीज़ पर लागू होती है।

ध्यान रहे

क्योंकि बच्चा बाहर से आने वाली आवाजों को सुन सकता है, ऐसे में एक बात का और ध्यान रखें कि उसे शोर से बचाएँ। क्योंकि ज्यादा शोर बच्चे के दिमाग के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे बच्चे के मस्तिष्क का विकास धीमा हो सकता है, या उसके सुनने की क्षमता भी खत्म हो सकती है। इसीलिए ज्यादा शोर वाली जगहों पर न जाएँ।

संगीत से बूस्ट होता है बच्चे का आईक्यू

क्या आप जानती हैं, कि क्लासिकल म्यूजिक आपके बेबी के आईक्यू लेवल को गर्भ में ही बढ़ा सकता है। हालाँकि इस बात पर अध्ययनों ने अभी तक मुहर नहीं लगाईं है। लेकिन अब बिंदास होकर अपनी पसंद का संगीत सुन सकती हैं, क्योंकि इससे आपके बच्चे को कोई नुकसान भी नहीं है। साथ ही यह संगीत आपके बच्चे को भी पसंद आएगा।

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ज्यादातर महिलाएं अजन्मे बच्चे से बात करने के लिए अपने प्रेगनेंट पेट का उपयोग करती हैं। प्रेगनेंसी के सेकेंड ट्राइमेस्टर में, बच्चा आपके शरीर के बाहर की आवाजों को भांप सकता है। इसके अलावा वह बाहर की आवाज, ट्यून्स का भी आंकलन करता है।

खासतौर से आपके बच्चे में, तेज़ से हुई आवाजों को सुनने की संभावना अधिक रहती है। The sounds your cutie gets used to in utero will be less likely to startle her after she’s born.

माँ की आवाज बच्चों के लिए अनमोल श्श्श्श्श्

जब आप प्रेगनेंट होती हैं, तो आपकी आवाज आपके बच्चे को स्पस्ट सुनाई देती है। खासकर, उस वक्त जब आप बात करती हैं, तब आपकी आवाज हड्डियों और शरीर के बाकी हिस्सों में गूंजती है, जो एक एम्पलिफाइंग का काम करता है। अध्ययनों से यह से पता चला है कि, जब आप बात करती हैं तो, आपके भ्रूण के दिल की दर बढ़ जाती है, जिससे कि वह और सतर्क हो जाता है। ऐसे में आपके लिए यह बेहतर होगा कि आप जोर-जोर से गाएँ, ताकि जब आप आने वाले वर्षों में उसे दोहराएँ तब वह उस आवाज को पहचान पाए।

But don’t despair, Dad — babies also learn to recognize other voices (including yours!) and sounds that they hear often in utero. Researchers have discovered that newborns react differently to words and sounds that were repeated daily throughout the third trimester compared to those they never heard during pregnancy.

हालाँकि, कभी-कभी लंबे समय तक दोहराया जाने वाला शोर, आपके शिशु के विकास या सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में अधिक शोर-शराबे वाली जगह से दूरी बनाए रखें।

कुछ लोगों का मानना है कि प्रेगनेंसी के दौरान शास्त्रीय संगीत सुनने से आपके गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग और बुद्धि को बढ़ावा देता है। हालाँकि, इसका कोई प्रमाण नहीं है। इसके अलावा आप अपने पसंदीदा धुनों

को सुन सकते हैं इसमें कोई बुराई नहीं है।  

 

 

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