आरएच नेगेटिव ब्लड ग्रुप और प्रेगनेंसी

प्रसव से पहले आपके ब्लड की जाँच की जाती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपके आरएचडी की स्थिति क्या है। जाँच के दौरान, दो ही बातें सामने आ सकती हैं, या तो पॉजिटिव होगा या निगेटिव। यदि आपका आरएचडी पॉजिटिव है, तो इसका मतलब है कि आपकी लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर एक खास प्रोटीन मौजूद है। यदि आप आरएच नेगेटिव हैं, तो आपकी कोशिकाओं में, यह प्रोटीन मौजूद नहीं है। भारत में ज्यादातर लोग आरएच पॉजिटिव पाए गए हैं, जबकि नेगेटिव लगभग 5 से 9 % लोग ही हैं।

क्या रेसस  (आरएच) फैक्टर का असर बच्चे पर पड़ता है?

आरएच फैक्टर किसी भी महिला के लिए केवल उन स्थितयों में ही मायने रखता है, जिनमें उसका खुद का फैक्टर आरएच निगेटिव हो और उसके बच्चे का पॉजिटिव हो। अगर, आप आरएचडी नेगेटिव हैं और आपके पति पॉजिटिव हैं, तो इस बात की संभावना ज्यादा होती है कि आपका शिशु भी आरएचडी पॉजिटिव ही होगा।

इस स्थिति में, यदि आपके बच्चे का रक्त, आपके रक्त में मिल जाता है, तो आपके शरीर का डी एंटीजन आपके बेबी के रक्त को बाहर तत्व समझ कर उसके विपरीत प्रतिक्रिया दे सकता है। इस स्थिति में, आपका शरीर इस रक्त के लिए एंटीबॉडीज का निर्माण करना शुरू कर देता है। यही स्थिति आपका शरीर कुछ रोग-प्रतिकारक (एंटीबॉडीज) पैदा कर सकता है, जो शिशु की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट करना शुरु कर देता है। इसी स्थिति को सेंसिटीसिंग (संवेदनशील) कहा जाता है।

हालाँकि इस प्रकार की “संवेदनशीलता” से आपकी,पहली गर्भावस्था प्रभावित नहीं होती, लेकिन जब आप दूसरी बार माँ बनती हैं, और यदि आपका बच्चा आरएच पॉजिटिव होता है, तब यही एंटीबॉडीज, प्लेसेंटा तक पहुंच कर आपके बेबी के शरीर में प्रवेश कर उसके रक्त की कोशिकाओं पर आक्रमण कर देती हैं। इस तरह की स्थिति में, सबसे पहले बच्चे में एनीमिया की शिकायत होती है। वहीं इसके घातक परिणाम, बच्चे के हार्ट फेलियर, या फ्लड रिटेंशन और बच्चे की मृत्यु के रूप में सामने आ सकते हैं। वहीं यदि बच्चा पैदा हो भी जाता है, तो उसका लीवर उन रक्त कोशिकाओं को नहीं संभाल पाता, जिनके ब्रेकडाउन की जरूरत होती है, और यही कोशिकाएं जब बच्चे के रक्त में मिल जाती हैं, तो उसे पीलिया की शिकायत हो जाती है।  

हालाँकि, एंटी-डी इंजेक्शन के द्वारा इस स्थिति को नियंत्रित भी किया जा सकता है। इसमें महिला के रक्त में एंटीबॉडीज को बनने से रोक दिया जाता है। इसके बाद जब आपके बच्चे का जन्म होता है, तो उसके ब्लड का एक सैंपल लिया जाता है, ताकि उसके ब्लड ग्रुप और रेसस  (आरएच) फैक्टर की स्थिति का पता लगाया जा सके। यदि आपके बच्चे का आरएच सकारात्मक है, तो ऐसे में आपको एक और एंटी- डी का इंजेक्शन दिया जाएगा। यह इंजेक्शन प्रसव के 72 घंटे के भीतर दी जानी चाहिए, ताकि आपके प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को यह ट्रिगर न कर सके।

 

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