प्रेगनेंसी या ब्रैस्ट फीडिंग के दौरान स्पाइसी फ़ूड

हाँ क्यों नहीं। आप प्रेगनेंसी में, स्पाइसी फ़ूड खा सकती हैं, लेकिन, यदि आपको गैस, अपच या अन्य  पेट से जुड़ी कोई समस्या न हो तो। क्योंकि इस तरह की स्थितियों में, आपका यह स्पाइसी फ़ूड, आपके हाजमे को और खराब कर सकता है और इसका सीधा असर आपके होने वाले बेबी या फिर आपके उस बेबी पर भी पड़ सकता है, जिसे आप अपना दूध पिलाती हैं।

यह बिल्कुल सच है कि, आपके एमनियोटिक द्रव या दूध के स्वाद में आपके आहार के अनुसार ही बदलाव नज़र आते हैं। ऐसे में, वही दूध आपके बेबी के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे में, आपको पोषक आहार लेना बहुत जरूरी है। लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आप स्पाइसी नहीं खा सकती। बस अपने पेट और हाजमे का ख्याल रखें। आपके आहार में, पोषकता ज्यादा होनी चाहिए। लेकिन जब भी आपका मन करे और आपको अपच की समस्या भी न हो तो, आप स्पाइसी खाइये। इसके लिए बेहतर होगा कि आप हफ्ते या 15 दिनों में एक ऐसा दिन रख लें जिस दिन आप स्पाइसी खाएं। साथ ही उस दिन स्पाइसी फ़ूड पर टूट कर न पड़े। आराम से और सीमित मात्रा में खाइये।

सामान्यतौर, पर महिलाएं जो स्पाइसी खाना पसंद करती हैं, वह अपने खान-पान में बदलाव नहीं करती हैं, भले ही वह प्रेगनेंट हो या बच्चे को ब्रैस्टफीडिंग कराती हों।   

हालांकि,  मसालेदार भोजन प्रेगनेंसी के दौरान आपके विकसित हो रहे भ्रूण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि स्पाइसी फ़ूड आपको जरूर प्रभावित कर सकता है। कई प्रेगनेंट महिला बिना किसी समस्या के स्पाइसी खानों को हज़म कर लेती हैं, वहीं कुछ महिलाओं में स्पाइसी फ़ूड के कारण हार्टबर्न और पाचन संबंधित समस्याएं देखी गई हैं। कुछ मामलों में, स्पाइसी खानों के कारण मॉर्निंग सिकनेस की समस्या भी पाई गयी है, इस प्रकार की समस्या खासतौर से उन महिलाओं में ज्यादा पाई गयी हैं , जिनका पहले से ही पेट संबंधित किसी प्रकार की समस्या रही हो। आमतौर पर, महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए, ताकि आपके बच्चे के पोषक तत्वों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

वहीं, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना ​​है कि मसालेदार भोजन गर्भावस्था के दौरान सुरक्षित है। क्योंकि, स्पाइसी फ़ूड आपके बच्चे के विकास में किसी भी प्रकार का बाधा उत्पन्न नहीं करता है, बल्कि यह बच्चे के स्वाद को विकसित करता है।

 

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