प्रेगनेंसी से जुड़े कुछ अजीबो-गरीब मिथ

प्रेगनेंसी नौ महीनों का एक ऐसा सफर है, जिसमें महिलाओं को बेहद अजीबो-गरीब स्थितियों को फेस करना पड़ता है। एक और तो जहाँ उसकी अपनी स्थिति इतनी नाजुक होती है कि वह हर वक्त शंकाओं और तरह-तरह के विचारों से घिरी होती है, वहीं दूसरी और उसे इस दौरान ऐसी अजीबो-गरीब चीजें सुनने को मिलती हैं, जो उसके लिए बहुत अजीब तो होती हैं, लेकिन अपने बेबी की सुरक्षा के लिए उन्हें इन सभी चीजों को स्वीकारना पड़ता है।

चलिए देखते हैं ऐसे ही कुछ अजीबो-गरीब मिथक जिनसे ज्यादातर प्रेग्नेंट महिलाओं को दो-चार होना पड़ता है-

  • ऐसा माना जाता है कि दीवार पर क्यूट बेबी की तस्वीरे लगाने से आपका बच्चा भी क्यूट पैदा होगा। हालाँकि, सच्चाई यह है कि नवजात का चेहरा जेनेटिक कारकों पर निर्भर करता है, न कि खूबसूरत बच्चे की तस्वीरें दीवार पर लगाने से। हाँ, यह जरूर सच है कि ऐसी तस्वीरों को देखकर प्रेगनेंट महिलाएं पॉज़िटिव महसूस करती हैं, जिससे कि उनकी सेहत पर अच्छा असर पड़ता है।
  • लोगों की धारणाएं है कि, सातवे महीने के बाद नारियल पानी पीने से बच्चे का सिर नारियल जैसा बड़ा हो जाता है। जो कि बिल्कुल गलत है, क्योंकि नारियल पानी पोटैशियम का अच्छा स्रोत माना जाता है, और साथ ही यह पेट के लिए भी अच्छा होता है। सच तो यह है कि इसका बच्चे के सिर पर कोई असर नहीं पड़ता।
  • ऐसा कहा जाता है कि, सुबह-सुबह सफेद चीज़ खाने से, बच्चा गोरा पैदा होता है। हालाँकि, यह बिल्कुल गलत बात है क्योंकि, अगर ऐसा होता तो हर कोई दूध-ब्रेड खा कर बच्चे को गोरा पैदा करता। सच्चाई तो यह है कि बच्चे का रंग उसके जेनेटिक्स (आनुवांशिकी) पर निर्भर करता है।
  • ऐसा माना जाता है कि, गर्भावस्था के पहले कुछ महीनों में जुड़वां केले खाने से, जुड़वां बच्चा पैदा होने की संभावना होती है। हालाँकि, अपने से बड़े लोगों को यह बात बिल्कुल समझानी चाहिए कि, कैसे एक फल जेनेटिक इशू को प्रभावित कर सकता है।
  • इसके अलावा लोगों का यह भी मानना है कि, प्रेगनेंसी क्रेविंग (खाने के प्रति लालसा) से भी बच्चे का लिंग निर्धारण किया जा सकता है। लेकिन, सच तो यह है कि, प्रेगनेंसी क्रेविंग शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण होती है न कि लड़के और लड़की की वजह से।  ऐसे में आप स्वस्थ आहार लें, और साथ ही अपनी प्रेगनेंसी को एन्जॉय करें।

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