प्रेग्नेंसी में थायराइड संबंधी विकार

प्रेगनेंसी का समय किसी भी स्त्री और उसके घरवालो के लिए बहुत ही खुशी और उत्सुकता का समय  होता है। लेकिन इस अवस्था में, प्रेग्नेंट लेडीज को जितनी खुश होती है, वह उतनी ही चिंतित भी रहती है। दरहसल इस समय, लेडीज को कई परिस्थितियों से गुजरना होता है। इन समस्याओं में से एक है। थाइरोइड डिसऑर्डर। यह दो प्रकार का होता है- हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म।   

थाइरोइड शरीर में पाया जाने वाला एक अंग है। यह गले में, सामने की तरह उपस्थित होता है। यह एक प्रकार के हॉर्मोन का उत्पादन करता है, जो चयापचय, हृदय और तंत्रिका तंत्र, वजन, शरीर का तापमान और कई अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में सहायता करता है।

हाइपरथायरायडिज्म

हाइपरथायरायडिज्म होने के सबसे आम कारण: हाइपरथायरायडिज्म होने का सबसे मुख्य कारण है,  हशिमोटो थयरोिडिटिस (यह एक प्रकार का ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है) इस बिमारी में शरीर, TSI (थायरॉयड स्टीमुलटिंग इम्यूनोग्लोबिन) नामक एंटीबॉडी का निर्माण करने लगता है, जो थाइरोइड को बहुत ज्यादा हॉर्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है।  

प्रेग्नेंसी के दौरान, नज़र आने वाले हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण–  हृदय की धड़कन तेज होना, अधिक तापमान के लिए ज्यादा सेंसिटिव होना और थकान।

सामान्य अवस्था में नज़र आने वाले लक्षण– असामान्य हृदय की दर, घबराहट, गंभीर मतली, मामूली कंपन, मामूली झटके महसूस होना, वजन घटना, आदि।

हाइपोथायरायडिज्म

हाइपोथायरायडिज्म होने के सबसे आम कारण: हाइपोथायरायडिज्म होने के सबसे आम कारण है- ग्रेव’स डिजीज (यह एक प्रकार का ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है)

इस बिमारी में अपनी ही शरीर की कोशिकाएं, थाइरोइड ग्लैंड सेल्स पर आक्रमण करने लगती हैं। जिससे शरीर में कम मात्रा में थाइरोइड हॉर्मोन बनता है।

प्रेग्नेंसी के दौरान, नज़र आने वाले हाइपोथायरायडिज्म  के लक्षणअत्यधिक थकान, और अचानक बहुत ज्यादा वजन बढ़ना।

सामान्य अवस्था में नज़र आने वाले लक्षण–  कब्ज, ध्यान केंद्रित करने के परेशानी, याद रखने में परेशानी, ठंडे तापमान के लिए संवेदनशील होना, मांसपेशियों में ऐंठन, आदि।   

अगर आपको पहले से ही थाइरोइड सम्बंधित बिमारी है, तो आपको प्रेग्नेंसी के दौरान, कुछ अन्य दवाइयों की जरुरत पढ़ सकती है। प्रेग्नेंसी के कुछ शुरुआती लक्षण, हाइपरथायरायडिज्म जैसे ही होते हैं। अगर आपको, हृदय की धड़कन तेज होना, वजन कम होना, लगातार उल्टियां जैसी समस्या हो रही है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योकि अगर इन अवस्था में थाइरोइड का समय पर इलाज न किये गया तो इससे समय से पूर्व बेबी का जन्म, प्रीक्लेम्पसिया, गर्भपात, जन्म के समय बेबी का वजन कम होना इत्यादि जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको थाइरोइड सम्बंधित बिमारी हुई है या पहले कभी थी, तो इस बारे में अपने डॉक्टर को जरूर बताए, ताकि वह समय से इसकी पहचान कर, इलाज कर सकें और बाद में होने वाली जटिलताओं को रोक सकें।  

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