प्रेगनेंसी में संभल कर कराएं अल्ट्रासाउंड नहीं तो हो सकती है शिशु में यह 4 समस्या

अल्ट्रासाउंड के दौरान बच्चों में होने वाली प्रॉब्लम | Ultrasound ke dauran bachhon men hone wali problem

गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर बच्चे की हर गतिविधि पर नज़र रखने के लिए समय-समय पर अल्ट्रासाउंड करते हैं। हालाँकि, आमतौर पर गर्भवती महिलाओं में अल्ट्रासाउंड गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के आस-पास किया जाता है। जिस दौरान डॉक्टर यह देखते हैं कि गर्भाशय में एक स्वस्थ बच्चे का विकास ठीक से हो रहा है या नहीं। इसके अलावा बच्चे के दिल की धड़कन, शरीर, हाथ और पैर की मूवमेंट को भी अल्ट्रासाउंड पर देखा जा सकता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि इन अल्ट्रासाउंड के कुछ दुष्प्रभाव भी हैं जो गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

ऐसे में, निचे कुछ इसके दुष्प्रभाव बताए जा रहें हैं, जो निम्न हैं-

मानसिक विकास में बाधा

अल्ट्रासाउंड से एक प्रकार की रे निकलती है जिसे रेडियोएक्टिव तरंग के नाम से जानते हैं। जो बच्चे के दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जिसके कारण गर्भ में पल रहे शिशु के मानसिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है।

ट्यूमर सेल्स का निर्माण

लगातार अल्ट्रासाउंड करवाने से डीएनए सेल्स को नुकसान पहुंचता है और इसके साथ ही शरीर में ट्यूमर सेल्स  भी बनने लगते हैं जो कि प्रीमेच्योर बर्थ और कभी-कभी मौत के जोखिम को भी बढ़ा देता है।

मानसिक और शारीरिक विकास में बाधा

गर्भावस्था के दौरान जो महिलाएं नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड करवाती हैं उनका होने वाला बच्चा  मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होता है जिससे किसी गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है।

इम्युनिटी सिस्टम का कमजोर होना

गर्भावस्था के दौरान बार-बार अल्ट्रासाउंड करवाने  से बच्चे का प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाता है, जिससे उसे कोई भी बीमारी जल्दी से अटैक कर सकती है।

गर्भावस्था में महिलाओं को कितनी बार अल्ट्रासाउंड कराया जाना चाहिए ?

गर्भवती महिलाओं में पूरे गर्भावस्था में दो बार तक अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दी जाती है।

  • गर्भावस्था के 8 से 14वें हफ्ते के दौरान, और दूसरा 18वें और 21वें हफ्ते के बीच में।

  • गर्भावस्था के शुरूआती दौरान में किए गए स्कैन को कभी-कभी डेटिंग स्कैन भी कहा जाता है। जहाँ सोनोग्राफर बच्चे की माप के आधार पर प्रसव का अनुमान लगाते हैं।

  • डेटिंग स्कैन में, एक डब ट्रांसलूसेन्सी (एनटी ) स्कैन को शामिल किया जा सकता है, जो डाउन सिंड्रोम के लिए संयुक्त स्क्रीनिंग परीक्षण का एक हिस्सा है।

वहीं दूसरा स्कैन सभी गर्भवती महिलाओं को कराने की सलाह दी जाती है, इस स्कैन को विसंगति (अनोमली) स्कैन या मध्य गर्भावस्था स्कैन कहा जाता है। जो आमतौर पर गर्भावस्था के 18 वें और 21वें सप्ताह के बीच में होता है। इस स्कैन के जरिए बच्चे में संरचनात्मक असामान्यताओं की जाँच की जाती है।

हालाँकि, कुछ महिलाओं को डॉक्टर दो से अधिक अल्ट्रासाउंड स्कैन करने की सलाह भी देते हैं। जो गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और उनकी गर्भावस्था के आधार पर निर्भर करता है। इसके अलावा डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के दौरान माँ के शरीर में कुछ चीज़ों का पता करते हैं, जो निम्न हैं-

  • शिशु के धड़कन का पता लगाना

  • गर्भ में एक या उससे अधिक बच्चे के बारे में पता लगाना

  • शिशु के स्थिति का पता लगाना (खासकर एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बारे में)

  • शिशु के सही पोजीशन में मदद मिलती है।

  • शिशु में ब्लड सर्कुलेशन की जाँच करना

  • इसके अलावा किसी अन्य प्रकार के दोष का भी पता लगाया जा सकता है।

ऐसे में, अगर देखा जाए तो गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल लगभग बहुत दिनों से हो रहा है और अभी तक इसका कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आया है। क्योंकि, डॉक्टर अल्ट्रासाउंड उचित कारणों से और जांच करने के लिए जितना कम से कम जरुरी हो उतना ही करते हैं।

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