प्रेगनेंसी में पति के साथ बनाएं स्ट्रांग बॉन्डिंग

प्रेगनेंसी के दौरान आपके अंदर और बाहर बहुत सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। क्योंकि, इस समय सब की नजरें आप पर टिकी होती हैं कि आप और आपका बच्चा कैसा है और क्या कर रहा है। लेकिन, इन सारे अनुभव से आपके पति बहुत अनजान और पीछे होते हैं। गर्भावस्था के दौरान आप काफी क्लिंजी (चिपचिपा) हो जाते हैं, जिससे कि आप अपने पति के बारे में बहुत ज्यादा चिंता करने लगती हैं। यह सब आपके शरीर में हार्मोन की मात्रा में वृद्धि के कारण होता है। ऐसे में आपकी समझदारी आपके पति की भावनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि आप उनके साथ एक अच्छी बॉन्डिंग बना सकें।

अक्सर, प्रेगनेंसी के दौरान, महिलाएं थोड़ी सी काल्पनिक, चिंतित और अपने पति के लिए थोड़ी सी एनोइंग हो जाती हैं। हालाँकि इसमें महिला का कोई दोष नहीं होता, बल्कि यह बदलाव, शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण आते हैं। .

प्रेगनेंसी के दौरान, महिलाओं को भी समझने की जरूरत होती है कि बेबी के उनके गर्भ में आने के बाद से ही वह माँ बनने का अहसास कर चुकी हैं। लेकिन आपके पति के लिए वह सभी चीजें महसूस कर पाना मुमकिन नहीं है। यह चीज आपके लिए भी थोड़ी परेशानी कारक हो सकती है। इस तरह की परिस्थितियों में आपके पति के लिए भी आपको समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।

ऐसे में आप दोनों के बीच कोई तकरार हो इससे बेहतर है कि आप अपने पति से बात करें। उन्हें ऐसी कोई किताब पढ़ने के लिए दें, जिससे वह प्रेगनेंसी में महिला में होने वाले बदलावों को पढ़कर आपकी मनोस्थिति को भी समझ सकें। क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान, आपको मूड़ स्विंग्स भी बहुत होते हैं, ऐसे में यदि आपके पति आपके मूड स्विंग्स को नहीं समझते हैं, तो इसकी वजह से आप दोनों के बीच तकरार भी हो सकती है।

ऐसा न हो इसके लिए बेहतर होगा कि आपका पति आपकी मनो: स्थिति को समझे और आप अपने पति की। प्रेगनेंसी के दौरान, महिला का अंतरंग संबंधों को लेकर मूड़ भी बदलता रहा है। ही सकता है कि आज आपका बिलकुल मन न हो और कल आप अपने पति के साथ इंटीमेट होना चाहती हों। यह चीजें आपके पति के लिए भी कन्फ्यूजिंग हो सकती हैं। इस तरह की स्थिति में वह भी आपको नहीं समझ पाते।

लेकिन जो भी हो, यह बेबी आप दोनों का है और उसकी जिम्मेदारी आप दोनों की ही है। ऐसे में क्यों न दोनों मिलकर अनुभवों को शेयर करें। अपने पति को अपने अनुभवों और अपनी भावनाओं से अवगत कराएं।

दोनों साथ में छुट्टियों पर कहीं घूमने जाएँ, अपनी भावनाएं उन्हें बताएं और उनकी जानें। अपने बेबी के साथ भी उनकी बॉन्डिंग बनने दें। कहीं साथ में डिनर करने जाएँ और साथ में वक्त बिताएं। उनके मन में क्या है वह भी जानने की कोशिश करें क्योंकि कई बार, उन्हें आपकी और आपके बेबी की चिंता आपसे कहीं अधिक होती है, लेकिन शायद वह जता नहीं पाते। लेकिन जब आप शान्ति से बैठ कर उनसे बात करेंगी तो वह भी आपकी बातों को समझेंगे। इससे आप दोनों के बीच बॉन्डिंग मजबूत होगी।

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