प्रेगनेंसी में क्यों जरूरी है विटामिन ए?

विटामिन ए वसा में घुलनशील विटामिन है, जो लिवर में स्टोर होता है, यह माँ और बच्चे दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह भ्रूण के विकास के लिए कई तरह से जरुरी है, जैसे ह्रदय, फेफड़े, किडनी, आंखों और हड्डियों के विकास के लिए। इसके अलावा, यह विटामिन बच्चे के सर्कुलेटरी (संचार), रेस्पिरेटरी (श्वसन) और नर्वस सिस्टम (केंद्रीय तंत्रिका तंत्र) के विकास में भी सहायक होता है। यह मेटाबोलिज्म फैट (वसा उपापचय) और संक्रमण प्रतिरोध के निर्माण में भी मदद करता है ।

विटामिन ए प्रेगनेंट महिलाओं में प्रसव के बाद ऊतकों की मरम्मत करने में भी सहायक है। साथ ही यह नजर को कमजोर होने से बचाता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

विटामिन ए के दो प्रकार के होते हैं- रेटिनोल्स या प्रीफॉर्मेड विटामिन ए, यह विटामिन मुख्य रूप से एनिमल सोर्स जैसे कि अंडे, दूध और लिवर में पाया जाता है। वहीं दूसरा विटामिन कैरोटीनॉयड होता है, जो मुख्य रूप से फल और सब्जियों में पाया जाता है।

हालाँकि, एक प्रेगनेंट महिला को प्रतिदिन 770 माइक्रोग्राम विटामिन ए की जरूरत होती है। लेकिन, यह जरूरी नहीं है कि आप प्रत्येक दिन इस विटामिन की मात्रा को पूरा करें, बल्कि आप इसे एक हफ्ते में भी पूरा कर सकती हैं।

आमतौर पर, विटामिन ए के मुख्य स्रोत निम्न हैं-

  • नारंगी और पीले फल
  • नारंगी, पीली और हरी पत्तेदार सब्जियाँ
  • अंडे
  • दूध

विटामिन ए की सबसे अधिक मात्रा बीफ या चिकन के लिवर में पायी जाती है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए इन्हें खाने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इनमें विटामिन ए की डोज बहुत ज्यादा होती है।  

शायद आपको पता होगा कि विटामिन ए की बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से जन्म दोष और लिवर विषाक्तता जैसी गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। साथ ही इसके लक्षण में रात के समय धुँधली दृष्टि और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली शामिल है। इसके अलावा कुछ लोगों में इसकी कमी के कारण

क्सेरोप्थल्मिा, कॉर्निया थिकनेस और ड्राईनेस की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है।   

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