प्रेगनेंसी में खून की कमी और इसका इलाज

प्रेग्नेंसी के दौरान, होने वाली सामान्य समस्याओं में, एनीमिया अर्थात खून की कमी एक बेहद गम्भीर समस्या है। यदि यह समस्या दूर न की जाए, तो इसका माँ और होने वाले बच्चे दोनों के स्वास्थ्य एवं विकास पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। वास्तव में, प्रेग्नेंसी की अवस्था में, महिलाओं की आयरन की जरूरत काफी ज्यादा बढ़ जाती है। यह तत्व, हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए जरूरी होता है। हीमोग्लोबिन ख़ून में पायी जाने वाली लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण करती हैं, जो कि शरीर की प्रत्येक कोशिका तक ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। प्रेग्नेंसी की अवस्था में, शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके लिए आयरन की ज्यादा जरूरत होती है। इसके अतिरिक्त, बच्चे की वृद्धि और गर्भनाल के लिए भी अतिरिक्त आयरन की जरूरत पड़ती है।

ऊपर बताए गए कारणों की वजह से ही गर्भावस्था के दौरान, आयरन की आवश्यकता सामान्य 18 मिली ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर 27 मिली ग्राम प्रतिदिन  हो जाती है। चूँकि आयरन की यह मात्रा, केवल सामान्य भोजन से प्राप्त  करना आसान नहीं है, इसलिए डॉक्टर महिलाओं को इस अवस्था में 30 मिली ग्राम एलिमेंटल आयरन पूरक आहार के रूप  लेने की सलाह देते हैं, जो बाजार में दवा की दुकानों पर उपलब्ध होती हैं।

इसके अतिरिक्त, भोजन में, जरूरत भर फॉलिक एसिड, विटामिन बी-12 युक्त आहार न लेने, ज्यादा रक्त स्राव होने अथवा सिकिल सेल जैसे रक्त विकार की आनुवंशिक बीमारी के कारण भी एनीमिया हो सकता है।

कैसे निपटे एनीमिया यानी खून की कमी से?    

इस समस्या के उपचार के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाएं जा सकते हैं-

  • आयरन युक्त खाद्य पदार्थ – एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए प्रसव पूर्व दिए जाने वाले सभी विटामिन अवश्य लें। स्वस्थ आहार लें, जिसमें पर्याप्त मात्रा में आयरन हो, जैसे- लाल माँस, पॉल्ट्री प्रोडक्ट्स और सेल मछली, शाकाहारी आयरन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे- सेम, मसूर, टोफू, किशमिश, खजूर, अंजीर, खुबानी, छिलका युक्त आलू, ब्रोकोली, गाँठ गोभी, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, ब्रेड, अखरोट-मूँगफली और बीज, गुड़, दलिया, जौ और आयरन फोर्टीफाइड अनाज आदि। यह माँसाहारी महिलाओं के लिए अच्छी बात है कि मानव शरीर शाकाहारी खाद्य पदार्थों में मिलने वाले आयरन की अपेक्षा माँसाहारी खाद्य पदार्थों से मिलने वाले आयरन को आसानी से अवशोषित कर लेता है।
  • पोषक तत्व जो शरीर की आयरन अवशोषण की क्षमता को प्रभावित करते हैं – कैल्शियम, आयरन के अवशोषण में रुकावट डालता है, इसलिए जहाँ तक  हो सके, हरी सब्जियाँ, माँस-मछली और अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थों को दूध, दही, पनीर आदि कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों के साथ न लें। आयरन की पूरक दवाएं दूध के साथ न लें। खाना खाने और दूध पीने के समय में थोड़ा बहुत अंतर रखें।
  • ऐसे तत्व जो आयरन के अवशोषण में मदद करते हैं- विटामिन सी आयरन अवशोषण को बढ़ा देता है। इसलिए हरी सब्जियों या अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थों के साथ विटामिन सी युक्त पदार्थ जैसे आँवला, नीबू, कैरी, अमचूर आदि खट्टे पदार्थों को शामिल करें। 

वास्तव में ये सभी उपाए आयरन की कमी से बचाव करते हैं। यदि किसी को आयरन की कमी या एनीमिया (रक्त की कमी) हो जाये, तो उसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को ज्यादा अपनाना चाहिए, क्योंकि यह ज्यादा कारगर तरीके से मदद करते हैं और साथ ही यह तथ्य भी महत्त्वपूर्ण है कि प्राकृतिक खाद्य पदार्थों का आयरन, पूरक आयरन की तुलना में शरीर के द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है।  

 

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