प्रेगनेंसी में कौन सा टॉयलेट होता है बेहतर?

यदि आपको प्रेगनेंसी से पहले से ही इंडियन टॉयलेट की आदत है, तो आप प्रेगनेंसी में भी इसे आसानी से प्रयोग कर सकती हैं। लेकिन यदि आपको आदत नहीं है, तो आपको इससे परेशानी हो सकती है। साथ ही एक बार इस बारे में अपने डॉक्टर से भी बात कर लें।

आम तौर पर, डॉक्टर कई कारणों से इंडियन स्टाइल टॉयलेट का प्रयोग करने की सलाह देते हैं, जैसे-

  • इंडियन स्टाइल टॉयलेट, लेबर और डिलीवरी के लिए सबसे सही प्राकृतिक स्थिति माना जाता है। क्योंकि, यह  यह बर्थ कैनाल को खोलने में मदद करता है, और साथ ही बच्चे को सही दिशा में मूव करता है।
  • इस पर नियमित रूप से बैठने से पेट और जांघ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे कि प्रसव में मदद मिलती है।
  • यह व्यापक रूप से वेस्टर्न स्टाइल टॉयलेट की तुलना में अधिक स्वच्छ माना जाता है।
  • प्रेगनेंसी के दौरान, इंडियन स्टाइल शौच का प्रयोग करने से कब्ज़ और बवासीर में राहत मिलती है।
  • इंडियन स्टाइल में, मलत्याग आसानी, जल्दी और पूर्ण रूप से होता हैं।

यदि आप अपनी प्रेगनेंसी के दौरान, भारतीय किस्म के शौच का इस्तेमाल कर रही हैं, तो ऐसे में कुछ बातों का  ध्यान रखना जरूरी है, जो निम्न हैं-

  • यह सुनिश्चित करें कि,  शौचालय साफ और सूखा है या नहीं,  
  • ऐसी चप्पल या जूते ही पहनें, जो फिसले नहीं,
  • यदि आप बढ़ते पेट के साथ नीचे बैठने में असुविधा महसूस कर रही हैं, तो शौच सीट के साथ वाली दीवार पर लोहे की रॉड या  हैंडल लगवाएं। ताकि आप उसकी सहायता से पकड़ कर खड़ी हो सकें।
  • स्टूल पास करने के दौरान अधिक बल न लगाएं, अगर आप कब्ज़ से पीड़ित हैं, तो अपनी डॉक्टर से संपर्क करें।
  • यदि आप पेडस्टल शौच (दोहरी टॉयलेट सीट) का उपयोग करती हैं, तो आप इस पर भी निचे की ओर झुक कर बैठ सकते हैं। क्योंकि, इस सीट पर वेस्टर्न स्टाइल में बैठना सुरक्षित माना जाता है लेकिन, जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आगे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे पेडस्टल टॉयलेट का इस्तेमाल असुविधाजनक होता जाता है।

इसके अलावा, यदि आपको दर्द, चक्कर, या कोई भी असामान्य लक्षण या गर्भावस्था सम्बन्धी जटिलताओं का अनुभव हो रहा हो, तो अपने डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। शायद आपके डॉक्टर, वेस्टर्न टॉयलेट प्रयोग करने की सलाह दें।

 

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