प्रेग्नेंसी में, जब पेट और कमर में होने लगे दर्द

गर्भावस्था के दौरान, पेट में हल्की-फुल्की समस्याएँ होना आम बात होती है। इस अवस्था में, पेट दर्द, विशेषकर पेट के निचले हिस्से में हल्का-हल्का दर्द भी हो सकता है। सामान्यतः यह दर्द किसी प्रकार की चिंता का विषय नहीं है, लेकिन यह दर्द बहुत ज्यादा हो तो, किसी बड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। यदि यह दर्द लगातार हो रहा हो और बढ़ता ही जा रहा हो, तो तो नज़रअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हम यहाँ पर कुछ ऐसे कारणों और परिस्थियों पर चर्चा कर रहे हैं, जिनमें पेट दर्द को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पेट दर्द के ऐसे कारण जो हो सकते हैं गम्भीर

  • एक्टोपिक प्रेगनेंसी (भ्रूण का गर्भाशय से बाहर स्थापित हो जाना)- यह स्थिति तब होती है, जब निषेचित अंडाणु (fertilized egg) गर्भाशय से बाहर, फेलोपियन ट्यूब में स्थापित हो जाता है। इस स्थिति में, यदि उपचार न किया जाए, तो यह जीवन के लिए ख़तरा हो सकती है। इस स्थिति में, पेट में दर्द, श्रोणि क्षेत्र में दर्द (pelvic pain), पेट के निचले हिस्से में चिकनाहट, वैजाइना का मुँह खुल जाना, ब्लीडिंग होना, कंधे में दर्द और शारीरिक गतिविधि या खाँसने अथवा मल-मूत्र त्याग आदि के दौरान दर्द होने की समस्याएँ हो सकती हैं।
  • गर्भपात- कभी-कभी, किसी महिला को गर्भावस्था के शुरुआती 20 हफ्तों के अंदर गर्भपात भी हो जाता है। इस स्थित में, गर्भपात के कुछ घंटों या कुछ दिनों पहले पेट में दर्द हो सकता है। आमतौर पर, गर्भपात का पहला लक्षण वैजाइना का मुँह खुल जाना और ब्लीडिंग होना है।
  • गर्भनाल झड़ना या भेल निकलना-  यह जीवन के लिए बहुत गम्भीर खतरा होता है। इस स्थिति में, बच्चे के जन्म से पहले ही गर्भनाल गर्भाशय से निकल जाती है। गर्भनाल पूरी तरह से भी निकल सकती है और आंशिक रूप से भी। इसमें अचानक ब्लीडिंग हो सकती है यह ब्लीडिंग हल्की या ज्यादा दोनों ही हो सकती है।
  • प्रीक्लेम्पसिया-  यह प्रेगनेंसी  के दौरान, होने वाली एक गम्भीर समस्या है, जिसकी वजह से महिला के ब्लड वेसल्स में बदलाव हो जाता है, इससे कई सारे अंग प्रभावित होते हैं। जैसे- लिवर, किडनी, मस्तिष्क, और प्लेसेंटा (गर्भनाल) आदि। इससे चेहरे और आँखों के आस-पास सूजन, हाँथों में सूजन और पैर एवं टखने के पास अचानक काफी ज्यादा सूजन के साथ-साथ पेट के ऊपरी हिस्से में चिकनाहट एवं तेज दर्द भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त तेज सिर दर्द, नज़र में गड़बड़ी, मितली और उलटी आदि भी हो सकती है।
  • मूत्र नली में इन्फेक्शन –  मूत्राशय या मूत्र नली में इन्फेक्शन होने से भी पेल्विक एरिया (श्रोणि क्षेत्र) या पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है। इस स्थिति में, बार-बार पेशाब आना, मैला अथवा ख़ून मिला हुआ बदबूदार पेशाब आदि लक्षण हो सकते हैं।
  • अन्य कारण –  इसके अतिरिक्त, पेट दर्द के कुछ ऐसे भी कारक हो सकते हैं, जिनका प्रेग्नेंसी से कोई संबंध नहीं होता। इन कारणों की वजह से पेट में बहुत तेज दर्द हो सकता है, इनमें पेट में वायरस, फ़ूड पोइज़निंग, अपेंडिक्स बढ़ जाने, किडनी में पथरी होने, हेपेटाइटिस, पित्ताशय की बीमारी, अग्नाशय बीमारी, फाइब्रॉएड या मल-मूत्र रुक जाना आदि हो सकते हैं।

यदि पेट दर्द ज्यादा तेज हो और साथ ही साथ वैजाइना का मुँह खुल गया हो और ब्लीडिंग हो रही हो तो लापरवाही बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए। इस स्थिति में लापरवाही जीवन के लिए खतरा हो सकती है।   

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