प्रेग्नेंसी में ड्राई आईज से राहत के उपाय

अक्सर प्रग्नेंट महिलाओं में, सेकंड ट्रिमस्टर में एण्ड्रोजन हॉर्मोन के स्तर में गिरावट के कारण, उन्हें ड्राई आई जैसी समस्या हो जाती है। इस हॉर्मोन में गिरावट के कारण, आँखों में नमी न रहना, आंसू न आना  जैसी समस्याएँ हो जाती हैं।

प्रग्नेंसी के दौरान, आपको आँखों का लाल होना, हल्‍का धुंधला दिखना या आंखों के सामने जाला जैसा बनना (और ऐसे लक्षण जैसे-जैसे दिन बढ़ता है, यह समस्या और ज्यादा बढ़ना), सो कर उठने के बाद आँखों का चिपकना और ठंडी हवा और तेज रोशनी के संपर्क में आने पर आँखों से पानी आना, इत्यादि जैसे लक्षण नज़र आ सकते हैं।

यदि यह लक्षण कुछ समय के बाद खुद-ब-खुद ठीक हो जाते हैं, तो घबराने वाली कोई बात होती, लेकिन यदि यह समस्या धीरे-धीरे बढ़ती ही रहती है, तो इसके लक्षण, आंखों का बहुत ज्यादा लाल होना, आँखों में दर्द, तेज रोशनी के संपर्क में आते ही, देखने में बहुत ज्यादा परेशानी दिखने लगते हैं। इस तरह की स्थिति में डॉक्टर से सम्पर्क करना जरूरी हो जाता है। इस तरह की स्थिति, आँखों के सामने वाले हिस्से को ढकने वाली ट्रांसपरेंट लेयर के क्षति ग्रस्त हो जाने से होता है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो इससे आँखों को स्थाई तौर पर नुक्सान भी हो सकता है।  

ड्राई आँखों की समस्या को बढ़ने से रोकने और इससे बचाव के कुछ टिप्स-

  • बहुत देर तक कंप्यूटर पर काम न करें। बीच-बीच में थोड़ा ब्रेक जरूर लें।  
  • हीटर के साथ, रूम में एक ह्यूमिडफायर भी इस्‍तेमाल करें, इससे अंदर की हवा में पर्याप्‍त नमी रहेगी। अगर आप चाहें तो दरवाजें और खिड़कियां खुली भी रख सकती हैं।
  • अपनी फोरफिंगर से, आँखों पर गोलाई में घुमाते हुए मसाज करें।
  • अपनी आँखों को हमेशा साफ़ रखें। इसके लिए, आप अपनी आँखों को हल्के गर्म पानी से धोएं। आप अपनी आँखों पर, (ग्लैंड के ऊपर) कॉटन से हल्का सा दबाव भी डाल सकती है , ताकि म्यूकस का निर्माण हो सकें।
  • बहुत ज्यादा ठंडी हवा, गर्म या शुष्क हवा से बचने के लिए सनग्‍लासेस पहनें और ये सनग्‍लासेस ऐसे होने चाहिए, कि आपके आँखों का ज्यादा से ज्यादा भाग कवर हो।
  • बहुत ज्यादा धुएं वाली जगह से दूर रहें, ताकि आँखों में ड्राईनेस न हो।

डॉक्टर से सलह लेकर, कोई ऑइंटमेंट या आई ड्राप का इस्तेमाल कर सकती हैं। बिना उसके सलाह के कोई भी दवा का इस्तेमाल न करें।

 

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