प्रेगनेंसी में ब्लड टेस्ट से पता चलता है इन 5 बिमारियों का

गर्भावस्था के दौरान अगर सबसे पहले कोई जाँच की जाती है, तो वह है ब्लड टेस्ट की। क्योंकि, डॉक्टर इसके जरिए इस बात का पता लगाते हैं कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। हालाँकि, इस टेस्ट के बाद भी डॉक्टर आपको कुछ और ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं, ताकि आपके अंदर किसी भी तरह के संक्रमण या बिमारियों का पता लगाया जा सके। क्योंकि, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को सबसे अधिक संक्रमण का खतरा रहता है।

ऐसे में कुछ ब्लड टेस्ट के बारे में बताया जा रहा है, जिसकी जाँच हर गर्भवती महिला को करानी चाहिए, ताकि इसके खतरों से बचा जा सके जिनमें निम्न शामिल हैं-

ब्लड ग्रुप

गर्भावस्था के दौरान आपका ब्लड ग्रुप जानना बहुत जरूरी है, क्योंकि गर्भावस्था या प्रसव के दौरान आपको खून की जरुरत पड़ सकती है। ब्लड ग्रुप 'ओ' आमतौर पर आसानी से मिल जाता है, जबकि 'ए', 'बी' व 'एबी' ग्रुप कम उपलब्ध होते हैं। इसलिए इस तरह के ब्लड ग्रुप का पता लगा लेना ही बेहतर होता है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे अरेंज किया जा सके।

आयरन का स्तर

डॉक्टर गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन के स्तर की जाँच करते हैं, यदि यह कम होता है तो यह एनीमिया की कमी को दर्शाता है। इसके लिए आपके शरीर को हीमोग्लोबिन के उत्पादन के लिए आयरन की आवश्यकता होती है, ताकि लाल रक्त कोशिकाओं के जरिये पूरे शरीर में आॅक्सीजन पहुंच सके।

ब्लड शुगर

इसके जरिए डॉक्टर इस बात का पता लगाते हैं कि आपके खून में शुगर की अधिक मात्रा तो नहीं है। क्योंकि, यदि आपका वजन सामान्य से अधिक है या फिर आपके परिवार में किसी को भी मधुमेह रहा है, तो आपको गर्भावधि मधुमेह (जैस्टेशनल डायबिटीज) हो सकता है। ऐसे में, यह जाँच हर गर्भवती महिला को कराना चाहिए।

हेपेटाइटिस बी

हेपेटाइटिस बी का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह बीमारी जानलेवा हो सकती है। क्योंकि, ब्लड टेस्ट के जरिए यह यह पता लगाया जा सकता है कि आपके गर्भस्थ शिशु तक हेपेटाइटिस बी के विषाणु तो नहीं पहुंच रहा है।

अगर, आप शिशु के पैदा होने से पहले या बाद में यह बीमारी उस तक पहुंचाती हैं, तो यह उसके लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। जिन शिशुओं को अपनी माँ से हेपेटाइटिस बी विषाणु पहुंचने का खतरा होता है, उन्हें पैदा होने के तुरंत बाद एंटीबॉडीज इंजेक्शन देकर सुरक्षित किया जा सकता है।

एचआईवी/एड्स

एचआईवी/एड्स की जाँच सभी गर्भवती महिलाओं को अपने प्रेगनेंसी के दौरान कराना चाहिए। क्योंकि, यदि आपमें यह संक्रमण है, तो गर्भावस्था के दौरान और शिशु के जन्म और उसके बाद भी ऐसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिनसे एचआईवी के विषाणु शिशु तक पहुंचने का खतरा कम हो सके।

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