प्रेगनेंसी में अस्थमा से निपटने के आसान तरीके

अस्थमा एक क्रोनिक इंफ्लामेटरी डिजीज है, जो हर प्रेगनेंट महिलाओं में एक आम स्वास्थ्य समस्या है। हालाँकि, यह जरूरी नहीं है कि महिला में अस्थमा के लक्षण पहले से ही मौजूद हों, बल्कि गर्भावस्था के दौरान, इसका विकास कभी भी हो सकता है। अस्थमा के कारण, जुकाम, खांसी या सांस संबंधी रोग, छाती में जकड़न आदि की समस्‍या हो सकती है।

प्रेगनेंसी के दौरान, अस्थमा, रक्तचाप में वृद्धि और प्रीक्लेम्पसिया जैसी समस्याओं को पैदा करता है। इतना ही नहीं अस्थमा, आपके अजन्मे बच्चे के लिए विशेष रूप से जोखिम पैदा कर सकता है, जैसे-  भ्रूण का अपरिपक्व या धीमी गति से विकास, समय से पहले (37 वें सप्ताह से पहले ) प्रसव, जन्म के समय कम वजन और यहाँ तक कि मौत का कारण भी बन सकता है।

हालाँकि, यह जरूरी नहीं है कि अस्थमा के कारण आपकी प्रेगनेंसी जोखिम या मुश्किल भरी ही रहे। यदि आप प्रेगनेंसी के दौरान, अस्थमा को नियंत्रित कर लेती हैं, तो ऐसे में आप एक स्वस्थ और सामान्य बच्चे को जन्म दे सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि, अस्थमा को नियंत्रित कर इसके जोखिम से बचा जा सकता है।

ऐसे में यह जरूरी है कि गर्भावस्था और अस्थमा का प्रबंधन सही तरीके से किया जाए।

  • यदि आपको प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही अस्थमा का पता चलता है, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। ताकि दवाओं या अन्य तकनीकों से इससे जल्द से जल्द  छुटकारा पाया जा सके।
  • प्रेगनेंसी के दौरान, अस्थमा के लक्षण, मामूली तौर पर एक जैसे या अधिक गंभीर भी हो सकते हैं। ऐसे में, धूम्रपान या वह खाद्य पदार्थ जिनसे आपको एलर्जी हो, आपकी समस्या को और भी बढ़ा सकते हैं। क्योंकि सिगरेट का धुआं एलर्जी को ट्रिगर करता है।  
  • प्रेगनेंसी के दौरान, अपने लंग इन्फेक्शन (फेंफड़ों के इंफेक्शन) पर लगातार नज़र बनाए रखें, ताकि आपको यह पता चल सके कि बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन मिल पा रही है या नहीं।
  • इसके अलावा, आप एक फ्लू का टीका भी लगवा सकती हैं, जो आपको फ्लू के खिलाफ सुरक्षित रखता है। साथ ही यह गर्भावस्था के दौरान, सुरक्षित भी माना जाता है।

गर्भवती महिलाएं, एलर्जी फ़ैलाने वाले पदार्थों से दूर रहें, क्योंकि कई अन्य चीजें जैसे एक्सरसाइज, संक्रमण, ठंडी हवाएं या मानसिक तनाव अस्थमा को बढ़ाने में मदद करता है, जो शिशु के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। साथ ही आप कोई भी दवा लेने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

 

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