प्रेग्नेंसी में पेट में दर्द, कहीं फ़ूड पॉइजनिंग तो नहीं

वैसे तो हर किसी को अपनी सेहत का ख्याल रखने की जरूरत होती है और स्वस्थ खान-पान की जरूरत सभी को होती है, लेकिन बात प्रेग्नेंट वुमन पर और ज्यादा लागू होती है। यहाँ यह बताने की जरूरत नहीं है, कि ऐसा क्यों है, क्योंकि हर कोई जानता है महिला जो भी खाती है, वह कहीं-न-कहीं उसके होने वाले बच्चे को भी प्रभावती करता ही है।

प्रेग्नेंट महिलाओं को पेट में दर्द होना भी एक आम समस्या है, जिसका एक कारण आपके खान-पान से जुड़ा यानि फ़ूड पॉइजनिंग भी हो सकती है। इसलिए अक्सर डॉक्टर प्रेग्नेंट लेडीज को बाहर का खाना खाने की सलाह नहीं देते। एक और खास बात कि प्रेग्नेंसी में, यह बात पता कर पाना भी थोड़ा मुश्किल होता है कि दर्द किस वजह से हो रहा है। ऐसे में, आप यदि उल्टा-सीधा खाती हैं, तो इसे आपको, आपके परिवार वालों और आपके बच्चे सभी को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

प्रेग्नेंसी में फ़ूड पॉइजनिंग  के लक्षण  

अक्सर फ़ूड पॉइजनिंग  होने से आपमें निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं-

  • जी मिचलाना
  • उल्टी
  • दस्त
  • बुखार और कमजोरी

आपके होने वाले बच्चे को भी नुक्सान  पहुंचा सकती है फ़ूड पॉइजनिंग 

यदि फ़ूड पॉइजनिंग को समय रहते न पहचाना जाए, तो यह निसंदेह आपके बच्चे को भी नुक्सान पहुंचा सकती है। वहीं कुछ विशेष प्रकार की फ़ूड पॉइजनिंग  जैसे- लिस्टेरिया पॉइजनिंग , होने से बेबी को और भी ज्यादा खतरा हो सकता है। इसलिए यदि आपको फ़ूड पॉइजनिंग के कोई भी लक्षण नज़र आ रहे हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें। यदि आपके डॉक्टर ने आपको कोई टेस्ट कराने की सलाह दी है, तो जरूर कराये।

प्रेगनेंसी में फ़ूड पॉइजनिंग का इलाज

फ़ूड पॉइजनिंग  होने से डिहाइड्रेशन (शरीर में पनि की कमी) होने का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए खूब पानी पिए और साथ ही जूस और सूप भी पीते रहें। यदि आप चाहें तो स्पोर्ट्स ड्रिंक को थोड़ा पतला (आधा गिलास स्पोर्ट्स ड्रिंक और आधा गिलास पानी) करके पी सकती हैं। आप इलेक्ट्रोलाइट्स भी ले सकती हैं, लेकिन ध्यान रहें, कि उसमें शुगर बहुत ज्यादा न हो।

फ़ूड पॉइजनिंग होने ही न दें

फ़ूड पॉइजनिंग रोकने का सबसे बेहतरीन तरीका है, अपने खान-पान पर जरूरी नियंत्रण। अधपके खाने और रेडी -टू- इट फ़ूड (पैकेट में मिलने वाला खाना, जिसे थोड़ा सा पका कर खाया जा सकता है) से बिलकुल दूर रहें। यदि आप रेडी -टू- इट फ़ूड का इस्तेमाल कर रही हैं तो ध्यान रहें कि वह अच्छे से पका हो और प्रयोग करने के बाद बचा हुआ पैकेट अच्छे से फ्रीज़ में (सही टेम्प्रेचर) रख दें। खाना बनाने वाले बर्तन अच्छे से साफ़ हो और खाना बनाने से पहले हाथों को अच्छे से साफ़ कर लें।

प्रेग्नेंट लेडीज को लिस्टेरिया का इन्फेक्शन होने की सम्भावना बहुत ज्यादा होती है। पैकेट में मिलने वाला खाना और मीट इत्यादि की जगह, ताजे सब्जियों और मीट का इस्तेमाल करें। लेकिन ध्यान रहें कि बंनाने से पहले इसे अच्छे से साफ़ कर लें और इन्हें अच्छी तरह से पका कर ही खाये, विशेष कर मीट को।

प्रेग्नेंसी में फ्रेश स्प्राउट खाना मना होता है, क्योकि इसमें इ- कोलाई नामक बैक्टीरिया होती है, जिससे फ़ूड पॉइजनिंग  हो सकती है। यदि आप प्रेग्नेंट हैं तो आपको कच्चे मांस (जैसे- कारपेसियो) और मछली (जैसे सुशी) इत्यादि चीजों को भी नहीं खाना चाहिए।

यदि आपको 48 घंटों से ज्यादा, कमजोरी, डिहाइड्रेटेड, मचली और चक्कर आ रहा है तो तुरंत अपने डॉक्टर से कंसल्ट करें।  

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