प्रेगनेंसी में भी बहुत जरूरी है त्वचा की देखभाल

अक्सर सुना जाता है, कि प्रेगनेंसी में महिला के चेहरे पर चमक आ जाती है। यहाँ तक कि कुछ महिलाएं तो ऐसी भी होती हैं, जिन्हें प्रेगनेंसी के दौरान, उल्टा और त्वचा से जुड़ी परेशानियां जैसे, रूखी और सूखी त्वचा और पिंपल्स भी हो जाती हैं। यहाँ ऐसी ही महिलाओं के लिए कुछ ट्रीटमेंट के बारे में हम चर्चा कर रहे हैं, जो प्रेगनेंसी के दौरान उनकी त्वचा के लिए फायदेमंद होती हो सकते हैं।

जैसे-

  • बेंजोईल पेरोक्साइड, ऐसा ही एक फायदेमंद घटक है, जो प्रेगनेंसी में, त्वचा पर पड़ने वाले दाग-धब्बों के लिए बहुत फायदेमंद है। साथ ही यह सुरक्षित भी है।
  • सैलिसिलिक एसिड (बी.एच.ए) भी ऐसा ही एक तत्व है, जो त्वचा की मृत त्वचा को हटा कर, उसे निखार प्रदान करता है। ध्यान रहे कि इसकी बहुत कम मात्रा का प्रयोग ही करना है।
  • इनके अलावा,  ग्लाईकोलिक एसिड या लैक्टिक एसिड (ए.एच.ए) भी त्वचा से दाग-धब्बे हटा कर उसे निखारने का कार्य करता है।
  • लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि त्वचा पर कुछ भी प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।  

प्रेगनेंसी के दौरान, त्वचा की देखभाल

प्रेगनेंसी में त्वचा पर हाइपरपिगमेंटेशन से निपटने के लिए उपाए   

इस तरह की स्थिति में, नियमित तौर पर, त्वचा को एक्सफोलेट करना यानी मृत त्वचा को साफ करने से, पिगमेंटेशन से राहत मिलती है। हमेशा धूप में जाने से पहले, कम से कम 25 एस.पी.एफ का सनस्क्रीम लगाकर ही, बाहर जाए।  

स्ट्रेच मार्क्स से निपटने के लिए उपाए  

प्रेगनेंसी के दौरान, और डिलीवरी के बाद त्वचा पर दिखाई देने वाले स्ट्रेच मार्क्स (खिंचाव के निशान) लगातार नौ महीने तक त्वचा में होने वाले असामान्य खिंचाव के कारण बनते हैं। हालाँकि कुछ महिलाओं में यह जेनेटिक भी हो सकते हैं और वहीं कुछ महिलाओं में मार्क्स नजर भी नहीं आते। ऐसे में, यदि प्रेगनेंसी के दौरान ही, किसी भी विटामिन ई युक्त तेल या सिरम से हल्के-हल्के मसाज की जाए तो, त्वचा ज्यादा लचीली हो जाती है और इससे स्ट्रेच मार्क्स नहीं बनते। साथ ही इसके लिए मार्किट में ख़ास तौर पर बनाई गई क्रीम भी मौजूद है। इसके अलावा, डिलवरी के बाद,  रेटिन-ए या रेनोवा के प्रयोग से भी स्ट्रेच मार्क्स से निजात पाई जा सकती है।

प्रेग्नेंसी में रॉसेसिया से निपटने के लिए उपाए

रॉसेसिया एक त्वचा रोग है, जिसमे चेहरे और नाक के क्षेत्रों में, लालिमा दिखाई देती है। इसमें, मुख्य रूप से माथे, ठोड़ी और नाक के आधे से निचले हिस्से में, दाने दिखाई देने लगते हैं। इन क्षेत्रों में, छोटे रक्त वाहिकाओं में विस्तार या चौड़े होने के कारण, त्वचा पर लाल लाइनों की तरह दिखाई देने लगते हैं, इसे रॉसेसिया कहा जाता है।

प्रेगनेंसी में मेट्रोनिड़जोल (मेट्रो क्रीम, मेट्रोजेल और मेट्रोलोशन में पाया जाने वाला एक एक्टिव इंग्रिडेंट है), का प्रयोग करना, सुरक्षित माना जाता है। इसके अलावा कोई भी ऐसी, माइल्ड सनस्क्रीन, जिसमें टिटैनियम या ज़िंक ऑक्साइड मौजूद हो भी, रॉसेसिया के लिए फायदेमंद होती है। वहीं, इनका प्रयोग प्रेग्नेंट के साथ-साथ, वह महिलाएं भी कर सकती हैं, जो गर्भवती नहीं हैं।  

प्रेगनेंसी में उम्र के निशान और झुर्रियों से निपटने के उपाए

उम्र के निशान और झुर्रियों से निपटने के लिए कई महिलाएं, प्राकृतिक रेटिनोएड या  रेटिनोएड युक्त क्रीम / जेल, या दवाइयों का सेवन करती हैं। प्रेगनेंसी में प्राकृतिक रेटिनोएड (जैसे गाजर) खाना सुरक्षित है, लेकिन अन्य रूप में  रेटिनोएड का प्रयोग (जैसे- रेनोवा, रेटिना- A, डीफ्रिन, टाजोरक, और जेनेरिक ट्रेटिनोइन) नहीं करना चाहिए।   

हालांकि, ऊपर बताई गयी जानकारी संपूर्ण नहीं है, लेकिन इससे आपको यह पता चलता है कि प्रेग्नेंसी में किन चीजों का प्रयोग करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए। इन बातों को ध्यान रख कर, आप प्रेग्नेंसी में भी अपनी त्वचा का ध्यान रख सकती हैं।

 

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