प्रेगनेंसी के इन 11 साइड इफेक्ट्स के बारे में जरूर पता होनी चाहिए हर महिलाओं को

जैसे ही आपको पता चलता है कि आप माँ बनने वाली हैं तब आपके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता है। लेकिन, जैसे-जैसे आपकी गर्भावस्था अंतिम चरण में पहुँचने लगती है ठीक वैसे-वैसे आपमें समस्याएं उत्पन्न होनी शुरू हो जाती हैं। क्योंकि इस दौरान आप शारीरिक और मानसिक कई तरह के बदलावों से होकर गुजरती है। एक ओर जहां आपको खुद को आने वाले जीवन के लिए तैयार करना पड़ता, वहीं दूसरी ओर कई शारीरिक बदलावों को भी सहन करना पड़ता है। ऐसे में, घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि इसका सामना करने का है। इसलिए, सबसे जरूरी यह है कि आपको प्रेगनेंसी के इन साइड इफेक्ट्स के बारे में पहले से पता होनी चाहिए ताकि आप इस समस्या का सामना खुल कर कर सकें।  

पेट दर्द

कभी-कभी आपको गर्भावस्था के दौरान पेट में दर्द की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। इस समय होने वाला दर्द आपमें कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि गंभीर अपच, एसिडिटी  या जलन, पेट के संक्रमण (उल्टी दस्त) या फिर दूषित, विषाक्त भोजन खाने से पेट के संक्रमण होने का खतरा रहता है। जिस कारण आपको पेट के मध्य या ऊपरी हिस्से में तीखा या तेज दर्द हो सकता है।

हालाँकि, इस तरह के दर्द होने पर एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें। क्योंकि, कभी-कभी इस तरह की समस्या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी, गर्भपात या समय से पहले प्रसव के कारण भी हो सकता है।

उल्टी की समस्या

प्रेगनेंसी के दौरान उल्टी की समस्या आम बात है, लेकिन अगर आप दिन में दो या तीन बार से अधिक उल्टी कर रही हैं, तब यह आपके लिए अच्छा नहीं है। क्योंकि, इससे आपमें डीहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो सकती है। जिससे कि आप कमजोरी महसूस कर सकती है। हालांकि, यह आपके शिशु के लिए नुकसानदेह नहीं है। फिर भी, अगर पहली तिमाही में आपको बहुत अधिकहो रही हो तब आप अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

कमर में दर्द

आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान शरीर का वजन बढ़ता चला जाता है, जिसका असर मुख्य रूप से मांशपेशियों और कमर की हड्डियों पर पड़ता है। सामान्यतः गर्भावस्था के दौरान कमर में दर्द होने का मुख्य कारण कैल्शियम और प्रोटीन की मात्रा में कमी होना है। साथ ही जैसे-जैसे गर्भावस्था का समय नजदीक आता जाता है, वैसे-वैसे कूल्हे के हड्डियों के लिंगामेंट ढ़ीले पड़ते जाते हैं, जिससे की दर्द की समस्या बनी रहती है। हालाँकि इससे राहत पाने के लिए आप अपने आहार में कैल्शियम और प्रोटीन युक्त आहार को शामिल करें। साथ ही हल्के-फुल्के एक्सरसाइज से भी आपको कमर दर्द की समस्या से राहत मिलेगी।

पैरों में दर्द होना

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला के ऊपरी हिस्से का वजन काफी बढ़ जाता है, जिससे कि पैरों पर बहुत अधिक भार पड़ने लगता है। इस वजन को हड्डियां सहन नहीं कर पाती हैं और इसकी वजह से हमेशा ही पैरों में दर्द बना रहता है। इतना ही नहीं इन दर्द के अलावा, पैरों में सूजन की समस्या भी देखने को मिलती है। इस तरह ही समस्या शरीर में पानी की अधिक मात्रा होने के कारण होती है। ऐसे में, इससे बचने के लिए महिलाओं को कम मात्रा में नमक और प्रोटीन का सेवन करने चाहिए।

शरीर में खुजली

गर्भावस्था के दौरान हल्की खुजली होना आम बात है। क्योंकि, जैसे-जैसे शिशु का आकार बढ़ता है वैसे-वैसे त्वचा भी अधिक फैलती है, तो ऐसे में थोड़ी खुजली होना सामान्य है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप खुद हाइड्रेटेड रखें और खुजली वाले जगह को नमी प्रदान करने वाली क्रीम लगा कर रखें। इससे आपको खुजली की समस्या से काफी आराम मिलेगा।

स्तन में दर्द

इस दौरान कई तरह के हॉर्मोनल परिवर्तन होते हैं जिसकी वजह से ब्रेस्ट बड़े और कड़े हो जाते हैं। जिसकी वजह से उनमें अक्सर दर्द बना रहता है।

चक्कर आना

गर्भावस्था में बेहोशी या चक्कर आना काफी आम बात है, लेकिन इसे इग्नोर करना बिल्कुल भी उचित नहीं है। क्योंकि, इस समय इस तरह कि समस्या इस बात का संकेत देती है कि आपने पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं किया है। इसके अलावा, इसका कारण रक्तचाप का कम होना भी हो सकता है, जो गर्भावस्था की शुरुआत में आम है। यह इसलिए होता है क्योंकि गर्भावस्था का हॉर्मोन प्रोजेस्टीरोन आपकी रक्त वाहिकाओं की दीवार को शिथिल कर देता है। ऐसे में, अगर आपमें यह समस्या बहुत अधिक बार हो रहा हो तो एक बार अपने डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

यूरिन पास करने में परेशानी

इस दौरान महिलाओं को बार-बार यूरिन पास करना पड़ता है, लेकिन यदि आपको यूरिन पास करते समय अत्याधिक दर्द या जलन महसूस हो रहा हो तब यह आपके लिए सही नहीं है। इसके अलावा, यदि आपको पेशाब से खून आ रहा हो, या श्रोणि, पेट के निचले हिस्से, पीठ के निचले हिस्से या पेट में दोनों तरफ दर्द हो तब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सिरदर्द

गर्भावस्था के दौरान हर सुबह सिर में भारीपन रहता है, इसका प्रमुख कारण ये भी होता है कि इस दौरान नींद अनियमित हो जाती है। ऐसे में नींद पूरी नहीं होने और हॉर्मोनल बदलावों चलते सिर में अक्सर दर्द बना रहता है। लेकिन, जब आपमें तेज सिरदर्द दो या तीन घंटों से अधिक रहे और साथ में पूरे शरीर पर सूजन और दृष्टि में परिवर्तन महसूस हो, तो आपको प्री-एक्लेमप्सिया हो सकता है। मगर, ऐसा गर्भावस्था का आधा चरण पार करने के बाद ही होता है। अगर आपके साथ ऐसा है, तो तुरंत अपनी डॉक्टर से संपर्क करें।

योनि से रक्तस्त्राव

गर्भावस्था की शुरुआत में खून के धब्बे या बिना दर्द के हल्का रक्तस्त्राव होना आम बात है। यह ‘ब्रेकथ्रू ब्लीडिंग’ हो सकती है, जिसके दौरान माहवारी शुरु करने वाले हार्मोन सक्रिय बने रहते हैं और हल्का रक्तस्त्राव करते हैं। फिर भी, गर्भावस्था के किसी भी चरण में रक्तस्त्राव होने पर अपनी डॉक्टर से बात करें। यह एक गंभीर समस्या हो सकती है।

उच्च रक्तचाप

हाई ब्‍ल्‍ड प्रेशर मां और उसके पेट में पल रहे बच्चे को गंभीर समस्याओं का शिकार बना सकता है। इससे समय से पूर्व बच्चे का जन्म और जन्म के समय बच्चे का वजन आवश्यकता से कम होने का खतरा बनता है।

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