प्रेग्नेंसी के दौरान कौन-कौन सी जाँच हैं जरूरी?

प्रेग्नेंसी की पुष्टि होने के बाद डॉक्टर, महिला को बहुत सी जाँच करवाने की सलाह देते हैं। इन जांचों के द्वारा बहुत सी जानकारियां प्राप्त की जाती हैं, जैसे, महिला को कोई समस्या तो नहीं है, गर्भाशय की स्थिति ठीक है या नहीं। मिसकैरेज की आशंका तो नहीं है। वेबी हेल्दी है या नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि यदि किसी भी तरह की समस्या जाँच के दौरान, सामने आती है तो उसका इलाज प्रारम्भिक तौर पर ही शुरू किया जा सकता है।  

डॉक्टर आपकी प्रेगनेंसी की जाँच के दौरान, आपकी उम्र को भी ध्यान में रखते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि आपकी उम्र का आपकी प्रेगनेंसी पर बहुत असर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर; अगर आप 35 से अधिक उम्र की हैं,  तो आपको हाई ब्लड प्रेशर, जेस्टेशनल डायबिटीज, प्लासेंटा प्रविया, प्रीक्लेम्पसिया, एक्टोपिक प्रेग्नेंसी जैसी समस्याएं होने की सम्भावना ज्यादा होती है। इसलिए डॉक्टर आपके, रेगुलर टेस्ट के अलावा, कुछ अन्य जाँच भी करवा सकते हैं।  

प्रेग्नेंसी के दौरानकी जाने वाली कुछ जरूरी और नियमित जांचें-
प्रेग्नेंट लेडीज का डॉक्टर सबसे पहल ब्लड टेस्ट करवाते हैं। ब्लड टेस्ट के द्वारा वह, ब्लड ग्रुप, Rh (रीसस फैक्टर), हीमोग्लोबिन और ग्लूकोस लेवल की जाँच करते हैं। ग्लूकोस लेवल की जाँच करके जेस्टेशनल डायबिटीज का पता लगाया जाता है। 35 से अधिक उम्र में, माँ बनने पर, जेस्टेशनल डायबिटीज  होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

अल्ट्रासाउंड

पूरी प्रेग्नेंसी के दौरान, बेबी के सही विकास को देखने के लिए कई बार अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाए जाते हैं। प्रेग्नेंसी के 11-13 हफ्ते में, क्रोमोजोमल एबनोर्मिलिटी (क्रोमोजोम में असमानता जैसे- डाउन सिंड्रोम) की जाँच करने के लिए, अल्ट्रासाउंड किया जाता है। 35 से अधिक उम्र में माँ बनने पर, बेबी में  क्रोमोजोमल एबनोर्मिलिटी होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

ब्लड प्रेशर

डॉक्टर  रेगुलर, प्रेग्नेंट लड़ी का ब्लड प्रेशर चेक करते रहते हैं और  हैं कि कही लेडी को हाइपरटेंशन तो नहीं। हाई ब्लड प्रेशर, प्रीक्लेम्पसिया की तरह निशारा करता है। 35 से अधिक उम्र में माँ बनने पर, प्रीक्लेम्पसिया होने की सम्भावना ज्यादा होती है।

यूरिन

यूरिन के द्वारा, बहुत से पैरामीटर जैसे- प्रोटीन, एल्ब्यूमिन, इत्यादि की जाँच की जाती है। यूरिन में प्रोटीन आना, प्रीक्लेम्पसिया का संकेत होता है।

कुछ ऐसे जाँच हैं, जो केवल 35 से अधिक उम्र पर माँ बनने वाली महिलाओं के लिए, किये जाते हैं-

एमिनोसेंटसिस
इस जाँच में एमनियोटिक फ्लूइड के द्वारा, डाउन सिंड्रोम की जाँच की जाती हैं।

ब्लड टेस्ट

लगभग 10 और 13 वें सप्ताह में रक्त परिक्षण द्वारा, डाउन सिंड्रोम और अन्य क्रोमोजोमल एबनोर्मिलिटी की जाँच की जाती है।

क्रोनिक विल्ली सैंपलिंग
इस टेस्ट में, भ्रूण में जेनेटिक गड़बड़ियों और अन्य जन्मजात दोषों की जांच की जाती है। इसमें प्लेसेंटा से सेल्स निकाल कर, जाँच की जाती है।

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