प्रेग्नेंसी के चौथे माह में बवासीर अर्थात पाइल्स की समस्या

प्रेग्नेंसी की इस अवधि में, आमतौर पर महिलाओं को बवासीर की समस्या हो जाती है। यह समस्या विशेषकर गर्भावस्था के 17वें-18वें सप्ताह में शुरू होती है। इसमें शुरुआत में मल त्याग के समय कठिनाई होती है। गुदा द्वार (एनस) के आस-पास के एरिया में दर्द और खुजली होती है तथा मल त्याग के बाद सफाई करते समय ख़ून की बूंदें दिखाई दे सकती हैं अथवा एनस के आस-पास मस्से जैसे दानें महसूस हो सकते हैं। कभी-कभी बवासीर की शुरुआत में किसी कठोर सतह पर बैठने में एनस एरिया में चुभन सी महसूस होती है।

क्या है बवासीर?

जब गुदा के ऊतक किन्हीं कारणों से सूज जाते हैं, तो उनमें  फैली हुई रक्त की नसें बढ़ने लगती हैं और झुण्ड के रूप में इकठ्ठा हो जाती हैं, जो संख्या में ज्यादा और सूजी हुई कोशिकाओं में स्थिति होने के कारण मस्से जैसे हो जाती हैं। ये मस्से कभी-कभी खुजली करते हैं और कभी-कभी बेहद परेशान करने वाले और दर्दनाक हो सकते हैं। इन मस्सों को ही बवासीर कहते हैं।

प्रेग्नेंसी में बवासीर होने की जोखिम का कारण-

प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भाशय (यूटेरस) के साइज में वृद्धि होती है। यूटेरस के साइज में वृद्धि होने के कारण श्रोणि क्षेत्र (पेल्विक एरिया) में दबाव बन जाता है, जिसके कारण रक्त का प्रवाह (ब्लड फ्लो) बढ़ जाता है। इसकी वजह से गुदा की दीवारों की नसें सूज कर फूल जाती हैं और उनमें खुजली होने लगती है। रक्त प्रवाह तेज होने की वजह से उनमें ख़ून भी आ सकता है। इस दौरान कब्ज़ होने के कारण भी बवासीर के मस्से हो सकते हैं।  यदि किसी महिला को पहले से ही बवासीर होती है तो यह समस्या प्रेग्नेंसी की स्थिति में और ज्यादा बढ़ सकती है।

इससे निपटने के उपाय –

हालाँकि बवासीर की समस्या प्रेग्नेंसी में बहुत कामन है, लेकिन चिंता करने की जरूरत नहीं है। यहाँ हम आपके लिए बहुत से ऐसे उपाय दे रहे हैं जो इस समस्या को पहले तो आने ही देंगें, और यदि समस्या हो ही जाए तो उसे दूर कर सकते हैं-

  • कब्ज़ न होने दें – कब्ज से बचाव के लिए अधिक फाइबर वाले आहार जैसे – साबुत अनाज, सेम, फल और सब्जियों, सलाद आदि जरूर लें। खूब सारा पानी पिएं और प्रतिदिन कुछ न कुछ व्यायाम अवश्य करें। यदि किसी वजह से आप ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं तो अपने डॉक्टर से सुझाव लेकर किसी स्टूल सॉफ़्नर (मल को पतला करने की दवा) ले सकती हैं यह भी कब्ज होने  बचाता है।
  • मल त्याग की जरूरत को दबाएँ नहीं – अगर मल त्याग की आवश्यकता महसूस हो रही हो, तो तुरंत जाएँ, और अगर मल त्याग की स्वाभाविक जरूरत नहीं महसूस हो रही हो तो दबाव न दें और लम्बे समय तक लैट्रीन में न बैठे। अनावश्यक प्रेशर देने से बवासीर की समस्या बढ़ सकती है।
  • बहुत ज्यादा समय तक बैठे य खड़े न रहें – प्रेग्नेंसी की अवस्था में बहुत ज्यादा समय तक बैठे य खड़े न रहें, बल्कि हल्के-फुल्के व्यायाम करते रहें। प्रेग्नेंसी के दौरान श्रोणि क्षेत्र से सम्बन्धित व्यायाम जिसे केजेल एक्सरसाइज कहते हैं, करने से बहुत लाभ होता है क्योंकि यह एक्सरसाइज गुदा क्षेत्र में ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करती है। इससे बवासीर को रोकने में मदद मिलती है।  
  • ठंडी-गर्म सिंकाई – गुदा क्षेत्र में ठंडी और गर्म सिंकाई करने से इस क्षेत्र में रक्त संचार तेज होता है जिससे बवासीर रोकने में मदद मिलती है।
  • गर्म पानी का सेंक – यदि बवासीर की समस्या हो जाए तो दिन में कई बार 10-15 मिनट के लिए कमर तक गुनगुने पानी में बैठे। इससे न केवल परेशानी में कमी होगी बल्कि गुदा क्षेत्र की सफाई भी होगी जो बवासीर रोकने के लिए जरुरी है।

यहाँ यह भी ध्यान रखना बहुत जरूरी  है कि पाइल्स की समस्या गुदा क्षेत्र की ठीक से साफ-सफाई करने से भी हो सकती है। साथ ही साथ सफाई न करने से खुजली और इन्फेक्शन की समस्या हो सकती है। इसलिए गुदा के आस-पास के एरिया को प्रतिदिन ठीक से सफाई अवश्य करें। इससे बवासीर अर्थात पाइल्स की समस्या से राहत मिलती है।

 

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