प्रेग्नेंसी का पहला अल्ट्रासाउंड और आपकी उम्मीदें

प्रेग्नेंसी का सातवाँ हफ्ता, वह समय होता है, जब भ्रूण का थोड़ा विकास हो चुका होता है। इस दौरान, अल्ट्रासाउंड टेस्ट होने पर पेट में पल रहे बेबी को देखा जा सकता है। अधिकांश महिलाएँ, इस समय डॉक्टरी सलाह और आने वाले नन्हें मेहमान की स्थिति एवं स्वास्थ्य की जानकारी के लिए डॉक्टर से चेक-अप कराती हैं।

जब पहली बार अल्ट्रासाउंड होता है, तो महिलाओं को मातृत्व का बड़ा सुखद और मीठा अहसास होता है। इसको अधिकांश महिलाओं ने माना भी है। प्रेग्नेंसी के दौरान, अल्ट्रासाउंड जाँच कराने से बच्चे के सही विकास की जाँच हो जाती है और इसके अतिरिक्त किसी प्रकार की गड़बड़ी तो नही है, इसकी भी पुष्टि हो जाती है।   

कैसे किया जाता है यह अल्ट्रासाउंड?

अल्ट्रासाउंड, कुछ बड़े डॉक्टर्स के क्लिनिक में, हॉस्पिटल्स में अथवा पैथोलॉजी सेंटर्स में किया जाता है। इसको करने के लिए, टेक्नीसियन आपको पीठ के बल लेटने के लिए कहता है और उसके बाद, वह एक प्रकार का गर्म जैल आपके पेट पर मलते हैं। यह जैल,  ट्रांसड्यूसर (एक प्रकार की हैंडल वाली मशीन, जो माइक्रोफ़ोन जैसी दिखाई देती है) को पेट पर आसानी फिसलने में मदद करता है। इसके साथ ही, यह शरीर के अंदर, साउंड वेव्ज (ध्वनि तरंगों) के ट्रांसमिशन (फैलाने) में मदद करता है। साउंड वेव्ज, शरीर के अंदर, विभिन्न अँगों की सतह से टकराकर कम्पन के रूप में, बाउंस (उछलती) होती हैं। इसी प्रकार, आपके पेट में, पल रहे बेबी से बाउंस होती हैं। इस प्रकार, टकराकर वापस आने वाली ध्वनि तरंगें अर्थात प्रतिध्वनि मशीन के द्वारा, इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स में बदल दी जाती हैं। यह इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स, चित्र में बदल जाते हैं, जो मॉनिटर पर दिखाई देते हैं। यह भी जानना  जरूरी है कि पेट का अल्ट्रासाउंड करने से माँ या बच्चे के स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।        

यदि किसी महिला को, प्रेगनेंसी की शुरुआत में, अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है तो वैजाइनल प्रोब (एक प्रकार का ट्रांसड्यूसर जो वैजाइना के अंदर डाला जाता है) जरूरत पड़ती है। अल्ट्रासाउंड के द्वारा, बेबी की हृदय गति, नाल, बेबी का साइज और गर्भनाल आदि को देखा जा सकता है। इसके साथ ही, यदि आपके पेट में, एक से अधिक बच्चे पल रहे हैं तो अल्ट्रासाउंड के द्वारा उसे भी देखा जा सकता है।

जाँच करते समय, यह भी देखा जाता है कि शरीर के आंतरिक अँगों, विशेषकर गर्भाशय, गर्भनाल अथवा बेबी के सामान्य शारीरिक विकास आदि में, किसी प्रकार की समस्या तो नहीं है। अल्ट्रासाउंड के द्वारा, बेबी के जन्म या प्रसव से सम्बन्धित सभी समस्याओं को नहीं देखा जा सकता है, नार्मल अल्ट्रासाउंड के द्वारा यह गारंटी नहीं दी जा सकती है कि पेट में पल रहा बेबी पूरी तरह स्वस्थ है। फिर भी, यह कहा जा सकता है कि अल्ट्रासाउंड, मेडिकल साइंस का एक महत्वपूर्ण यंत्र है, जिसके द्वारा यह लगभग निश्चित किया जा सकता है, कि आपकी प्रेग्नेंसी और बेबी दोनों सही रास्ते पर हैं। किसी विशेष परिस्थिति को छोड़कर आप सुरक्षित रूप से माँ बन सकती हैं।    

 

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