प्रेगनेंसी और त्यौहारों से जुड़े कुछ मिथक

प्रेगनेंसी और त्यौहारों से जुड़े कुछ मिथक  

प्रेगनेंट वुमन के लिए, उसके 9 महीने इतने महत्वपूर्ण होते हैं, कि उसे हर एक कार्य सोच समझ कर और बड़े-बुजुर्गों की मर्जी अनुसार ही करना होता है। ऐसे में, जब बात त्यौहारों की हो, तो भी उसके लिए, क्या करना है और क्या नहीं करना है की लम्बी फेहरिस्त होती है।

भारतीय परम्पराओं में, कुछ ऐसे रीति-रिवाज भी हैं, जिन्हें भारीतय लोग सदियों से मानते और करते आ रहे हैं, लेकिन विज्ञान इन मान्यताओं को मंजूरी नहीं देता। विज्ञान के अनुसार यह मान्यताएं सिर्फ और सिर्फ मिथक हैं।  

ऐसे मिथक और मान्यताएं जिनसे विज्ञान नहीं है सहमत

  1. ग्रहण हो तो घर से बाहर मत निकलो- जहाँ एक और हमारे पूर्वजों के अनुसार, ग्रहण में प्रेगनेंट वुमन का घर से बाहर निकलना उनके और उनके बच्चे के लिए नुक्सानदेह हो सकता है, वहीं दूसरी और विज्ञान इस बात का कोई प्रमाण नहीं निकाल पाया है कि ग्रहण से महिला और उसके होने वाले बच्चे को कोई नुक्सान हो सकता है। इसका एक सबसे बड़ा सबूत यह भी है कि ग्रहण एक साथ पूरे विश्व में घटित होता है, लेकिन न ही तो दूसरे देशों में इसे प्रेग्नेंट वुमन के लिए नुक्सानदायक पाया गया है और न ही वह घर में रहती हैं। भारतीय परम्परा की माने तो ग्रहण में महिला के बाहर निकलने पर, उसके बच्चे के होंठ में दरार हो सकती है या फिर उसके शरीर पर कोई गहरा निशान हो सकता है।
  2. अगर होली खेलोगे तो बच्चे को नुक्सान होगा- देश के कुछ हिस्सों में, गर्भवती महिला के लिए होली खेलना भी ठीक नहीं माना जाता। वहीं यदि इसके पीछे विज्ञान को माने तो, यदि आप हानिकारक रंगों का प्रयोग करती हैं, तो आपको निसंदेह नुकसान हो सकता है। इसके अलावा, होली खेलने से महिला या उसके बच्चे को और कोई हानि नहीं होती।
  3. होली खेलने से आने वाला मेहमान लड़की होगी- देश के कुछ हिस्सों में यह भी मान्यता है कि यदि प्रेगनेंट वुमन होली खेलेगी, तो उसका होने वाला बच्चा लड़की ही होगा। वहीं किसी महिला को लड़का होगा या लड़की यह पूरी तरह से उसके और उसके पार्टनर के जींस पर निर्भर करता है।
  4. दीवाली से बच्चे को नुक्सान- दीवाली की रात अमावस्या की रात होती है और इसमें भी गर्भवती महिला को बाहर अँधेरे में नहीं निकलने दिया जाता। वहीं विज्ञान भी दीवाली को गर्भवती महिलाओं के लिए थोड़ा नुक्सानदेह तो मानता है, लेकिन इसलिए नहीं कि वह रात अमावस्या की होती है, बल्कि इसलिए क्योंकि दीवाली में पटाखों से होने वाला प्रदूषण उनके लिए नुक्सानदेह हो सकता है।

व्रत रखें या न रखें?

भारतीय परम्परा के अनुसार, व्रतों और त्यौहारों में, फ़ास्ट (व्रत) रखने का चलन बहुत ज्यादा होता है। ऐसे में, जब बात गर्भवती महिला की हो, तो उसके लिए व्रत रखना, स्वास्थ्य की दृष्टि से ठीक नहीं है। एक कहावत है, ‘हेल्थ इज़ वेल्थ’ यदि आप स्वस्थ हैं, तो आप जिंदगी की कोई भी जंग जीत सकते हैं। लेकिन यदि आप अपने स्वास्थ को बना कर नहीं रख पाए तो आप कोई काम ढंग से नहीं कर पाएंगे। प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ज्यादा देर तक भूखा रहना बिल्कुल ठीक नहीं होता। ऐसे में, यदि आप व्रत करती हैं, तो आपको नीचे दी गई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

जैसे-

  • सिरदर्द
  • कमजोरी
  • बेहोशी
  • एसीडिटी

 

यदि इन आपने व्रत रख ही लिया है और इसके बाद आपको ऊपर दी गई परेशानियां हो गई हैं तो एक बार अपने डॉक्टर से बात जरूर करें। प्रेगनेंसी के दौरान, पुराने मिथ और अंधविश्वासों का आँख बंद कर पालन करने के बजाय डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें।

 

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