प्रेगनेंसी और ब्रैस्टफीडिंग के दौरान अपने आहार में इन 6 फ़ूड को जरूर शामिल करें

जैसे ही आप माँ बनने वाली होती हैं, वैसे ही लोगों द्वारा बधाई देने का सिलसिला शुरू हो जाता है। लेकिन, इन सब के बावज़ूद जो सबसे जरूरी चीजें हैं, जिन पर आपको विशेष तौर पर ध्यान देने की जरूरत है वह है आपके खाने-पीने की। क्योंकि, आपके खाने-पीने का प्रभाव न केवल आपके ऊपर पड़ता है, बल्कि इसका असर गर्भ में पल रहे शिशु पर भी सामान्य रूप से पड़ता है। हालांकि, माँ को अपने खान-पान का ध्यान न केवल गर्भावस्था के दौरान करनी चाहिए, बल्कि ब्रैस्टफीडिंग के दौरान भी समान रूप से ध्यान रखना होता है।

आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान कुछ ऐसे मिथ हैं जो अक्सर दादी-नानी के द्वारा सुनने को मिलते हैं कि आपको इस दौरान ये चीजें खानी हैं और ये चीजें नहीं खानी हैं। ऐसे में, आप मिथ और मेडिसिन दोनों के बीच फंस कर रह जाती हैं कि आपको किसकी बात माननी चाहिए। इसलिए हम आपको कुछ ऐसे आईडिया बता रहें जिससे कि आप आसानी से तय कर सकती हैं कि आपके लिए क्या सही है और क्या गलत, जो निचे दिए जा रहे हैं-

पपीता और गर्भपात

गर्भावस्था के दौरान अधिकतर दादी-नानी पपीता से दूरी बना कर रहने की सलाह देती हैं। क्योंकि, उनका मानना है कि इस दौरान पपीता का सेवन करने से गर्भपात का खतरा हो सकता है। लेकिन, सच्चाई यह है कि कच्चे पपीता में कायमोपापिन (chymopapin) होता है, जो गर्भपात और जल्दी प्रसव के कारण को पैदा करता है। लेकिन, पका हुआ पपीता सुरक्षित माना जाता है, और साथ ही यह विटामिन ए का सबसे अच्छा स्रोत होता है।

अनानास

यदि आपको प्रेगनेंसी के दौरान फल खाने का मन कर रहा हो, तब ऐसा नहीं है कि आप भरपेट नहीं खा सकते हैं। खासकर, अगर बात अनानास की करें तो इसमें ब्रोमेलैन नामक केमिकल होता है, जिससे लोगों को यह लगता है कि यह असमान्य रक्तस्राव के कारण को पैदा करता है। इसलिए इस दौरान लोग इसे खाने से परहेज करते हैं। लेकिन सही तथ्य यह है कि इस तरह की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आप एक दिन में आठ से 10 अनानास एक साथ खाते हो। न कि एक बाउल अनानास खाने से इस तरह की समस्या उत्पन्न होती है।

स्पाइसी फूड

लोगों का भी मानना है कि ज्यादा स्पाइसी फ़ूड खाने से भी जल्दी प्रसव की समस्या उत्पन्न होती है। लेकिन, सच्चाई यह है कि ज्यादा, तीखा या तेल-मसाला वाले आहार के सेवन से आपको हार्टबर्न और एसिडिटी की समस्या उत्पन्न हो सकती है। थोड़ा-बहुत खाने से कोई समस्या उत्पन्न नहीं होती। है

कैफीन का सेवन और बच्चे का वजन

लोगों का ऐसा मानना है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान बहुत अधिक कॉफी का सेवन करती हैं उनके बच्चों का वजन कम होता है। लेकिन, यदि आपको कॉफी का सेवन करना है तब आप ब्रैस्टफीडिं के बाद कर सकती हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कॉफी ब्रैस्ट मिल्क के प्रवाह को कम कर देता है।

मछली और मछली का तेल

मरकरी- कुछ मछली में मिथाइल मर्करी काफी ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। मिथाइल मर्करी भ्रुण के मस्तिष्क, नर्वस सिस्टम और किडनी को नुकसान पहुचाती है। यह एक जहरीला एसिड है जो भ्रूण को नुकसान पहुंचाती है। लेकिन, यह भी सही नहीं है सारी मछलियों के एक जैसे दुष्प्रभाव हैं, ऐसे मछलियों का सेवन करें जैसे- श्रिम्प, टूना और सलमान कर सकते हैं। वहीँ स्वोर्डफ़िश और किंग मैकरेल से दूरी बना कर रहें।  

सामान्य भोजन का सेवन

कुछ महिलाओं का मानना है कि स्तनपान के दौरान भी उतना ही भोजन किया जाना चाहिए जितना कि गर्भवस्था के दौरान किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हें लगता है कि यदि उचित तरीके से आहार न लिया गया तो बच्चे का वजन कम हो सकता है। जबकि ऐसा नहीं है, क्योंकि स्तनपान के दौरान आपके शरीर को अतिरिक्त कैलोरी की आवश्यकता होती है, खासकर एक दिन में 500 कैलोरी की जरूरत होती है। इसके अलावा, आपका शरीर आपके आहार से स्तनदूध का उत्पादन करने में अत्याधिक कुशल होता है। इसलिए आपको विशेषतौर पर कैलोरी समृद्ध आहार लेने की आवश्यता नहीं होती। बेहतर है कि आप अपनी भूख के अनुसार ही खाएं और सामान्य भोजन का ही सेवन करें। इसके लिए आप अपने आहार में केला, बादाम, दही, इडली और साबुत आनाज को शामिल कर सकती हैं।

इसके अलावा, किसी भी तरह की विशेष जानकारी इससे संबंधित लेनी हो तो एक बार डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

This article was published in association with Teddyy’s Diapers.

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