प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मालिश क्यों जरूरी है ?

प्रसव के बाद महिलाओं के लिए मालिश एक भारतीय परंपरा का हिस्सा है। खासकर, शिशु के जन्म के बाद नई माँ के पूरे शरीर की रोजाना 40 दिनों तक मालिश की जाती है, इसे प्रसवोत्तर मालिश भी कहा जाता है। हालाँकि, हमारे समाज में प्रसव के बाद मालिश की परंपरा इसलिए है, क्योंकि शिशु के जन्म की थकान से उबरने के लिए यह एक बेहतर विकल्प है। इतना ही नहीं, शिशु के जन्म की पूरी प्रक्रिया से आपके शरीर पर काफी जोर पड़ता है, जिससे कि आपको मालिश की जरूरत पड़ती है।

हालाँकि, प्रसव के बाद मालिश के बहुत फायदे हैं, जो निम्न हैं-

  • डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया से आपके शरीर पर काफी जोर पड़ता है, खासकर पेट, पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों पर। अगर आप सही अवस्था में शिशु को स्तनपान नहीं करवाती हैं, तो आपकी पीठ में ऊपर की तरफ भी दर्द हो सकता है

  • आमतौर पर, मालिश से मांसपेशियों में रक्त और आॅक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे विषैले तत्व बाहर निकलते हैं, और आप काफी आराम महसूस करती हैं।

  • मालिश आपके शरीर को एंडोर्फिन बनाने के लिए प्रोत्साहित करती है, जो कि प्राकृतिक दर्द निवारक और अच्छा महसूस कराने वाला हॉर्मोन है, जो दिमाग से निकलता है।

  • मालिश, शरीर को आॅक्सीटॉसिन जारी करने में भी मदद करती है। आॅक्सीटॉसिन लेटडाउन रिफ्लेक्स को सक्रिय करता है, जिससे आपके स्तनों से दूध निकलता है।

  • अगर आपका सीजेरियन आॅपरेशन हुआ है, तो मालिश आपको जल्दी ठीक होने में मदद कर सकती है। हालांकि, जब तक घाव पूरी तरह भर नहीं जाता, तब तक इस पर मालिश न कराएं। ठीक होने के बाद उस क्षेत्र पर हल्के हाथों से मालिश करने से रक्त आपूर्ति बढ़ती है और अंदरूनी घाव ठीक होने में भी मदद मिलती है।

  • मालिश आपको पहले जैसा फिट और दुबारा से आपके बॉडी फिगर को लाने में मदद करता है।  

  • बेबी ब्ल्यूज और प्रसवोत्तर अवसाद का सामना करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा मालिश, तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।

कुछ स्थिति में मालिश करने से बचें, जैसे कि-

  • त्वचा में किसी भी प्रकार की कोई समस्या होने पर, जैसे कि एलर्जी, चकत्ते, एक्जिमा आदि होने पर।

  • चिकित्सिकीय समस्या होने पर।

  • हाई बीपी (इसके लिए एक हल्का मालिश करने की कोशिश करें)

  • हर्निया जैसी समस्या होने पर।

 

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