प्रसव के बाद, एकांतवास की रस्म

कई पीढ़ियों से, हमारे भारतीय समाज में एक ऐसी परंपरा है कि, माँ और बच्चे को एक सिमित समय के लिए, घर से बाहर निकलना मना होता है। हालाँकि, ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बेबी को इन्फेक्शन होने खतरा रहता है। ऐसे में बेबी को इन्फेक्शन से बचाने और साथ ही माँ को आराम करने के लिए, ऐसा किया जाता है। सच तो यह है कि कनफिनमेंट का समय, हर समुदाय और क्षेत्र के लोगों के लिए, अलग-अलग होता है। कोई भी लेडी, एकांतवास अवधि का पालन तभी कर सकती है, जब उसे परिवार के सदस्यों का सहयोग हासिल हो। इन पारंपरिक एकांतवास प्रथाओं का पालन, संयुक्त परिवारों में रहने वाली महिलाओं या फिर, अपने माता-पिता के घर जाकर डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को, अधिक करना होता है। पारंपरिक तौर पर, एक नई माँ के लिए, एकांतवास की अवधि में कई पाबंदियां होती हैं। शिशु के जन्म की थकान से उबरने के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं, ये पाबंदियां इन्हीं मान्यताओं पर आधारित हैं। यदि आपको इनमें से कुछ प्रतिबंधो का पालन करने में कठिनाई हो रही है, तो अपने परिवार के सदस्यों से बात कर सकती हैं। आमतौर पर, एकांतवास की अवधि 40 और 60 दिनों के बीच की होती है। जानिए क्या हैं ये पाबंदियां और इसके कुछ फायदे हैं-

  • माँ और बच्चे का कुछ दिनों के लिए अलग रखना- इसका, मुख्य रूप से दो उदेश्य होता है- पहला बेबी को संक्रमण से बचाना और दूसरा यह कि कुछ दिनों के लिए, माँ को प्राइवेसी मिलती है।  
  • मातृत्व का विकास- जरूरी नहीं कि सभी महिलाओं को बेबी की देखभाल के बारे में उचित जानकारी हो, इसलिए इस एकांतवास और परिवार के बड़ों से सिखने का अवसर मिलता है, कि बेबी की देखरेख कैसे करें।
  • पौष्टिक खाद्य-पदार्थ- स्तनपान कराने वाली माँ को, अच्छी तरह से खिलाया-पिलाया जाना चाहिए, खासकर, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन, मसाले और जड़ी बूटियाँ, जिससे कि माँ के दूध में वृद्धि हो। इसकेअलावा डिलीवरी के बाद, सेहत में जल्दी सुधार लाने के लिए भी माँ को पौष्टिक खाना खिलाया जाता है।
  • उचित आराम- एकांतवास के दौरान, पुरे दिन में कम से कम एक बार महिला के पूरे शरीर की मालिश की जाती है। जिससे, उसके थके हुए शरीर को काफी आराम मिलता है। साथ ही यह रक्तसंचार को तेज करता है।

हालांकि, आजकल की पारंपरिक महिलाएं एकांतवास का पालन नहीं करती हैं। शायद इसलिए, क्योंकि उन्हें वापस अपनी नौकरी पर जाना होता है या फिर उनके पास कोई उचित सहयोग नहीं होता है। कुछ महिला, डिलीवरी के बाद, एकांतवास की इस धारणा को पुराने जमाने की बात मानती हैं। शिशु के जन्म के बाद के शुरुआती कुछ सप्ताह, आप कैसे गुजारना चाहती हैं, यह पूरी तरह आप,  आपके परिवार और आपकी मान्यताओं पर निर्भर करता है। यदि संभव हो तो, आप एकांतवास का पालन जरूर करें, क्योंकि नीचे आपको कुछ ऐसे कारण बताए जा रहे हैं, आपको यह पता चलेगा कि इन्हें पालन करने से आपको क्या लाभ मिलता है-

  • बाद में, हो सकता है कि आपके पास इतना समय न हो कि आप अपने बेबी को पर्याप्त समय दें। इसलिए यह सबसे अच्छा समय है और अपने बेबी के साथ समय बिताए और अपनी थकावट को दूर करें।  
  • डिलीवरी के बाद, आराम करने का यह सबसे अच्छा समय है। इसलिए आप कुछ दिनों के लिए, अपने घर संभालने का काम किसी और व्यक्ति को दे सकती हैं।
  • चाहें आप अपने बेबी को ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं या फॉर्मूला फीडिंग, यह समय सबसे अच्छा है, जिस समय आप बिना अपनी फिगर के बारे में सोचते हुए, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन का सेवन कर सकती है।

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