पारंपरिक पालना या नए जमाने के तरीकों से बेबी को सुलाए?

बेबी को कैसे सुलाना है, इस विषय पर अक्सर आपकी, अपने बड़े बुजुर्गों के साथ चर्चा होती होगी। कुछ लोगों का मानना है कि बेबी को पारंपरिक पालने (कपडे या लकड़ी के बने झूले) में सुलाने का तरीका ज्यादा सही है, वही कुछ मानते हैं आज कल बाज़ार में मिलने वाले बेबी के बेड ज्यादा अच्छे होते हैं। तो आइए इन दोनों तरीकों को आपस में तुलना करके देखे कि सही तरीका क्या है?

 

                पारंपरिक पालना                       नए ज़माने के पालने
बेबी को, मुलायम सूती कपड़े के बने झूलें में सुला सकती हैं। ये, किसी लकड़ी या धातु से बना झूला भी हो सकता है।चारपाई के आकर की, जिसके चारों तरफ रेलिंग होती है। इससे बेबी के गिरने की सम्भावना कम हो जाती है।
अगर यह, सही तरीके से बना हो (चाहे यह कपडे का झूला हो या लकड़ी का) तो, इससे बेबी को बहुत आनंद आता है। अगर इसमें आप, तकिए या खिलौनें रख देती हैं तो इससे बेबी को घुटन और अचानक मृत्यु (SIDS) जैसी समस्या भी होने का खतरा होता है।
जब बेबी, उलटना-पलटना शुरू करता है तो इसके गिरने का खतरा होता है। ऐसे पालने में बेबी के गिरने की सम्भवना कम होती है।  
इस प्रकार के पालने में सोने पर बेबी को पहले तो अच्छा लगता है, लेकिन बाद में, जब वो थोड़ा बड़ा होता है और उसे बेड पर सुलाया जाता है तो उसे थोड़ी परेशानी होती है। इस प्रकार के पालनों से सोने से बेबी का विकास सही होता है और बाद में इसे बेड में भी बदला जा सकता है। इसलिए ऐसे पालनों में सोने पर बेबी को बाद में, बेड पर सोने में कोई परेशानी नहीं होती है।
जब बेबी उलटना-पलटना, बैठना और खिसकना सिख लेता है तो उसके गिरने का खतरा बढ़ जाता है।  इस तरह के पालनों में चारों तरह रेलिंग होती है, इसलिए बेबी के गिरने का ख़तरा कम होता है। लेकिन जब बेबी चढ़ना सिख लेता है तो उसे पर निगरानी रखने की जरुरत होती है।
इस तरह में पालनों में आप बेबी पर ज्यादा निगरानी नहीं रख पाती। पालनों में बने रेलिंग से आप, बेबी को आराम से देख सकती हैं।

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