क्या सच में! केसर के दूध से पैदा होते हैं गोर बच्चे?

अक्सर, हम अपने बुजुर्गों से सुनते हैं, “केसर का दूध पीने से बच्चे गोर पैदा होते हैं”। हम भारत वासी ऐसा करते भी हैं, लेकिन मेडिकल साइंस ऐसा नहीं मानती। मेडिकल साइंस के अनुसार, बच्चे की रंगत पूरी तरह से उसके माता-पिता के जींस पर निर्भर करती है।

हाँ यह बात जरूर सच है कि प्रेग्नेंट महिला के खान-पान से बच्चे की सेहत पर असर जरूर पड़ता है। यदि बच्चे की सेहत अच्छी होगी तो उसकी त्वचा भी अच्छी ही होगी, लेकिन इससे बच्चे की रंगत उसके माता-पिता की रंगत से ज्यादा गोरी हो जाएगी यह सोच एक मिथ हध्यान रहे कि हम यहाँ यह नहीं कह रहे हैं कि केसर का दूध पीने से कोई फायदा नहीं होगा या किसी प्रकार का कोई नुक्सान होगा, बल्कि केसर का सेवन महिला और उसके बच्चे के स्वास्थ्य के लिए हर तरिके से फायदेमंद ही रहेगा।

यहाँ तक कि स्टडीज में यह भी पाया गया है कि केसर का सेवन ब्लड प्रैशर, प्रेगनेंसी में होने वाली घबराहट और मूड स्विंग्स के लिए बहुत फायदेमंद होता है। ध्यान रहे कि इसका सेवन भी सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

जहाँ, परंपरागत रूप से लोग, केसर को प्राकृतिक उपचार के तौर पर प्रयोग करते आ रहे हैं, वहीं मेडिकल साइंस भी इसे सेहत के लिए अच्छा मानती है। केसर में हीलिंग प्रॉपर्टी होती है। ख़ास तौर पर, यदि बात मांसपेशियों के स्वास्थ्य और आराम की हो या पेट दर्द की हो तो केसर को इनके लिए बहुत अच्छा माना जाता है। केसर, प्रेगनेंट महिलाओं के पाचन को सुधारने में भी बेहतर है और उनमें भूख भी बढ़ाता है।

बहरहाल, प्रेगनेंट महिला केसर का प्रयोग कभी भी शुरू कर सकती हैं। जहाँ दूध प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, वहीं एक ग्लास दूध में, केसर के दो तार डाल कर उसका सेवन सोने पर सुहागे का काम करता है। बिरयानी, खीर, लस्सी और अन्य खाने-पीने की चीजों में प्रयोग होने वाला केसर प्रेग्नेंट लेडीज की सेहत के हिसाब से बहुत फायदेमंद है।

केसर खरीदते समय, इस बात का ध्यान जरूर रखें कि जो केसरआप खरीद रही हैं, वह उच्च क्वालिटी का है या नहीं। क्योंकि बाजार में, केसर अक्सर मिलावटी पाया जाता है, इसलिए हमेशा ब्रांडेड पैकेट ही खरीदें, जो आईएसआई चिह्नित हो। जिसे सरकार से मंजूरी दी गयी हो,और हमेशा लेबल को पढ़ कर एक्सपायरी डेट की जाँच जरूर करें।

 

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