गर्भपात के 6 जोखिम कारक और इसके साइड इफ़ेक्ट !

किन कारणों से गर्भपात की संभावना और बढ़ जाती है? | Kin karano se garbhpat ki sambhawana badh jati hai?

किसी भी महिला के लिए माँ बनना सबसे ख़ुशी का पल होता है, लेकिन उससे भी अधिक दुःख गर्भपात के बाद होता है। क्योंकि, किसी भी महिला पर इसका असर मानसिक और शारीरिक दोनों रूप में पड़ता। इतना ही नहीं महिलाएं गर्भपात के बाद अवसाद का शिकार होने लगती हैं। अब ऐसे में यह बात आती है कि आख़िरकार इसकी असली वजह क्या है, और इसके बाद शरीर पर होने वाले प्रभाव क्या हैं?

हालाँकि, देखा जाए तो गर्भपात के कई ऐसे कारक हैं जो इसको बढ़ावा देते हैं, और तो और किसी-किसी महिलाओं में इसके साइड इफ़ेक्ट दूसरों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है।   

निम्नलिखित परिस्थितियों के दौरान महिलाओं को गर्भपात में अधिक जोखिम होता है:

उम्र

गर्भपात का एक सबसे बड़ा कारण बढ़ती उम्र भी है, क्योंकि यह इसके खतरे को बढ़ा देता है। हालाँकि, देखा जाए तो 35 साल से कम उम्र के महिलाओं में 15 परसेंट गर्भपात का खतरा रहता है, जबकि 35 से 45 साल की महिलाओं में 20 से 30 परसेंट तक का खतरा रहता है।

पहले भी गर्भपात का इतिहास रहा हो

यदि किसी महिला में इसका इतिहास रहा हो तो उन महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

ख़राब आदतें

कुछ महिलाओं में उनके ख़राब आदतें भी इसकी एक वजह है जो अपने हेल्थ का ध्यान नहीं रखती हैं, और अधिक मात्रा में अल्कोहल, धूम्रपान आदि का सेवन करती हैं। ऐसी महिलाओं में गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, ख़राब लाइफस्टाइल भी इसका एक कारण है।

गंभीर बीमारियाँ

कुछ महिलाओं एमन आटोइम्यून विकार, मधुमेह या फिर हार्मोन संबंधी विकार जैसे पॉलीसिस्टिक ओवरियन सिंड्रोम आदि भी आपके गर्भपात के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा, एक शोध में यह बातें सामने आई हैं कि मोटापा भी गर्भपात के जोखिम कारक को बढ़ावा देता है।

क्रोमोसोमल असामान्यता

यह गर्भपात के सबसे सामान्य कारणों में से एक है। प्रारंभिक गर्भपात आम तौर पर होता है जब भ्रूण जिस रूप में विकसित होना चाहिए नहीं हो पाता । क्रोमोजोम समस्याओं को इसका सबसे आम कारण माना जाता है । यह आमतौर पर बिना किसी कारण के होती हैं और शिशु के सही विकास में रोकथाम लती हैं ।

इन असामान्यताओं का कारण हो सकता है गुणसूत्रों की गलत संख्या हैं या फिर एक गुणसूत्र की संरचना में परिवर्तन । इन मामलों में, गर्भावस्था भ्रूण स्तर पर ही पहले 10 हफ्तों में समाप्त हो जाता है ।

इम्यून सिस्टम रिस्पांस

महिलाओं में मिसकैरेज की समस्या संक्रमण के कारण भी उत्पन्न होती है। खासकर, यदि किसी महिला के प्रजनन अंगों में संक्रमण हो जाए तो इससे मिसकैरेज होने की सम्भावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। माइकोप्लाज्मा होमिनिस और यूरीप्लास्मा यूरीलीटिकम दो ऐसे बैक्टीरिया है जो गर्भवती महिलाओं के जननांग में संक्रमण पैदा करते हैं और इससे मिसकैरेज होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है। हालाँकि, यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब आप का इम्म्यून्ट सिस्टम अच्छे से रिस्पांस नहीं कर रहा होता है। क्योंकि, आपके भ्रूण को संरक्षण करने में इम्मयून सिस्टम का बड़ा हाँथ होता है।

गर्भपात के साइड इफ़ेक्ट क्या हैं ?

  • गहरा सदमा लगना

  • शारीरिक और मानसिक परेशानी

  • अवसाद की स्थिति उत्पन्न होना

  • तनाव पूर्ण स्थिति

  • खानपान डिसऔर्डर

  • बेचैनी

  • बात-बात पर गुस्सा आना

  • अपराधबोध की स्थिति उत्पन्न होना

  • सेक्स में कमी

  • अकेलापन महसूस होना

  • आत्मविश्वास में कमी

  • नींद में कमी

हालाँकि, इससे बचने के लिए आप अपने परिवार वालों की मदद लें, उनके साथ खुश रहने की कोशिश करें। इसके अलावा, आप अकेले और गुमसुम रहने से बचें इससे आपकी तकलीफ और बढ़ सकती हैं। साथ ही जितना ही सके खुश रहने की कोशिश करें।  

मॉर्डर्न मोना- मदर लाइफस्टाइल! एक दैनिक कॉलम, जहाँ महिलाओं से संबंधित पूरी जानकारी दी गई है।  जैसे- स्वास्थ्य, फैशन, फिटनेस, बच्चों का रख-रखाव, मनोरंजन, सेक्स आदि की जानकारी के लिए आप अपने सवाल इस ईमेल https://zenparent.in/communityपर भेज सकते हैं।

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