गर्भवती महिलाएं बच कर रहे इन बरसाती मच्छरों से नहीं तो शिशु को होगी यह समस्या

बरसात के मौसम में न केवल बीमारियाँ दस्तक देती हैं बल्कि कुछ मच्छर ऐसे हैं जो आपको बीमार बनाने के लिए काफी हैं। खासकर इन दिनों अगर किसी को सबसे ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है तो वो हैं गर्भवती महिलाएं। क्योंकि, इन्हें बरसात के मच्छरों से न केवल खुद की रक्षा करनी है बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु का भी खास ख्याल रखना होगा।

बरसात में पनपने वाले मच्छर कौन-कौन से हैं ?

बरसात के दिनों में सबसे अधिक जो मच्छर पनपते हैं वह है, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया। इन मच्छरों से महिलाओं को बच कर रहना चाहिए क्योंकि, यह शिशु के लिए घातक हो सकती हैं। ऐसे में, निचे उन मच्छरों से होने वाले समस्या और लक्षण के बारे में बात की जा रही है जो निम्न हैं-

मलेरिया

बरसात के मौसम में पनपने वाले मच्छरों में मलेरिया का भी नाम शामिल है, जो मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से फैलता है।

इसके लक्षण क्या हैं ?

  • ठंड के साथ तेज़ बुखार

  • सिर में दर्द

  • मांशपेशियों में जोरों की दर्द  

  • उल्टी और दस्त की समस्या

  • पसीना आना

  • खांसी

गर्भ में पल रहे शिशु पर प्रभाव

गर्भवती महिला पर मलेरिया का काफी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है, जो गर्भ में शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। क्योंकि, मलेरिया से होने वाले इन्फेक्शन और बुखार के कारण गर्भपात, समय से पहले शिशु का जन्म आदि की समस्या हो सकती है। इसके अलावा, मलेरिया प्लासेंटा को भी संक्रमित कर सकता है जिससे कि प्लासेंटा शिशु तक जरूरी पोषक तत्वों को पहुंचा पाने में सक्षम नहीं होता है। जो कहीं न कहीं शिशु के विकास में बाधा उत्पन्न करता है।

उपचार क्या है ?

गर्भावस्था के दौरान मलेरिया होने पर आप डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयां अवश्य लें। क्योंकि, यदि मलेरिया का इलाज तुरंत और प्रभावी ढंग से कराया जाए, तो होने वाली माँ को मलेरिया होने के बावजूद माना जाता है कि अधिकांश गर्भस्थ शिशुओं को इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचता।

चिकनगुनिया

चिकनगुनिया  एक वायरल फीवर है, जो घर या उसके आस-पास के जगहों में जमा पानी के दौरान पनपता है। चिकुनगुनिया को फैलने का सबसे बड़ा कारण संक्रमित मादा टाइगर है जो इस विषाणु को फैलाता है।  

इसके लक्षण क्या हैं ?

  • तेज़ बुखार

  • तेज सिरदर्द

  • जोरों की ठंड लगना

  • मिचली और उल्टी की समस्या

  • जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द

बच्चों पर होने वाले प्रभाव क्या हैं ?

हालाँकि, इस मामले में अभी तक कोई खास रीसर्च है की गयी है, लेकिन जो भी शोध हुए हैं उनमें यह बातें सामने आई हैं कि गर्भावस्था में माँ को चिकनगुनिया होने पर यह विषाणु शिशु तक नहीं पहुँचता है। वास्तव में, जिन माँ को गर्भावस्था में चिकनगुनिया होता है, वे अपने शिशुओं को कुछ हद तक प्रतिरक्षण क्षमता (इम्यूनिटी) प्रदान कर देती हैं, जो कि शिशु के साथ करीब एक साल तक रहती है।

उपचार क्या है ?

यदि शिशु के जन्म के समय पर आपको चिकनगुनिया हो, तो यह शिशु में जटिलताएं पैदा कर सकता है, इसलिए यह जरुरी है कि मच्छर निरोधकों का इस्तेमाल किया जाए और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क किया जाए।

गर्भावस्था में डेंगू

डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो संक्रमित मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। कुछ मामलों में यह जानलेवा साबित हो सकता। है

इसके क्या लक्षण हैं ?

  • तेज बुखार

  • त्वचा पर लाल दाने और चकत्ते

  • मांसपेशियों एवं जोड़ो में दर्द

  • सिरदर्द की समस्या

  • उल्टी दस्त

  • नाक और मसूढ़ों से खून आना

बच्चों पर होने वाले प्रभाव क्या हैं ?

गर्भावस्था के दौरान डेंगू का होना गंभीर रूप ले सकता है, क्योंकि इस दौरान आपकी इम्युनिटी सिस्टम बहुत कमजोर हो जाती है जिससे कि माँ के साथ-साथ बच्चे पर भी असर होता है। इतना ही नहीं गर्भावस्था में डेंगू होने से प्री-एक्लेमप्सिया, समय से पहले प्रसव और जन्म के समय शिशु का कम वजन होना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, जिन गर्भवती महिलाओं को डेंगू होता है, उनमें सीजेरियन आॅपरेशन के जरिये शिशु का जन्म कराया जाता है।

उपचार क्या है ?

अगर, गर्भवती महिला को डेंगू हुआ हो तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें, क्योंकि हो सकता है कि आपको अस्पताल में कुछ दिन के लिए रखा जाए जब तक कि आप पूरी तरह से ठीक न हो जाएं। इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी होने से बचाने के लिए ड्रिप लगाया जाता है। साथ ही आपके रक्तचाप (ब्ल्ड प्रेशर) को भी स्थिर रखा जाएगा।

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