गर्भावस्था के दौरान पैरों में ऐंठन

गर्भावस्था के दौरान ऐंठन की समस्या बेहद आम बात है, खासकर तीसरी तिमाही के दौरान।

  • आपका पैर पूरे गर्भस्थ शिशु के वजन को सहन करता है, जिसके कारण पैरों में ऐंठन की समस्या उत्पन होती है।

  • आपकी बढ़ती गर्भाशय पैरों के कुछ नसों पर दबाव डालती है, जिसके कारण पैरों में ऐंठन की समस्या उत्पन होती है।

  • शरीर में, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे कुछ पोषक तत्वों की कमी होने के कारण शिशु माँ के शरीर से सभी पोषक तत्वों को लेता है, जिससे कि यह समस्या उत्पन होती है।

पैरों में ऐंठन की रोकथाम

  • नियमित व्यायाम से आप पैरों में होने वाले दर्द की संभावना को कम कर सकती हैं। अगर, आपको व्यायाम करने की आदत नहीं है, तो धीरे-धीरे इसकी शुरुआत करें। इसके लिए आप, दीवार से एक मीटर दूर खड़े हो जाएं और अपनी ओर झुक कर हाथ से दीवार को छूने की कोशिश करें।

  • खुद को हाइड्रेटेड रखने की कोशिश करें, क्योंकि इस समय आपको बहुत बार यूरिन पास करना पड़ता है।

  • अपने पैरों को 30 बार बैंड और फैलाने की कोशिश करें, और फिर प्रत्येक दिशा में एक पैर बारी बारी से घुमाएं 

  • ज्यादा लंबे समय के लिए खड़े न रहें और न ही अपने पैरों को क्रॉस करके बैठें।

  • बिस्तर पर जाने से पहले गुनगुने पानी से स्नान करें।

  • अपने पैर की उंगलियों नीचे की तरफ कर के न सोएं।

पैरों में दर्द होने पर क्या करें?

  • मालिश करने से थकी और पीड़ाग्रस्त मांसपेशियों को आराम मिलता है, ऐसे में अपने पैरों की मालिश करें।

  • सुनिश्चित करें कि आप किसी ऐसे प्रशिक्षक से एक्यूपंक्चर थैरेपी कराएं, जिन्हें गर्भावस्था में एक्यूपंक्चर के इस्तेमाल का प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त हो।

  • टहलने की कोशिश करें।

  • उचित सहारा देने वाले कम ऊंचे और आरामदायक जूते या सैंडलपहनें। क्योंकि, ऊंची ऐड़ी के सैंडल या जूते आपकी कमर के निचले हिस्से पर बहुत ज्यादा दबाव डालते हैं। इसकी वजह से वजन बढ़ने पर आपको पीठ दर्द शुरु हो सकता है।  

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