गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन

गर्भावस्था के दौरान मछली का सेवन किया जाना चाहिए, लेकिन इसका सेवन कम मात्रा में करें।

क्यों आपको मछली खाना चाहिए?

  • मछली में ओमेगा -3 फैटी एसिड, डीएचए और ईपीए का एक प्रमुख स्रोत माना जाता  है।

  • संतृप्त वसा कम मात्रा में पायी जाती है।

  • इसमें प्रोटीन, विटामिन डी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो एक बच्चे के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि, प्रेगनेंसी के दौरान सारे मछलियों का सेवन नहीं करने की सलाह दी जाती है। खासकर, एक सप्ताह में तैलीय मछली की दो से ज्यादा सर्विंग न खाएं। तैलीय मछलियों में बांगड़ा, पेड़वे या माथी मीन, रावस या सामन मछली, ट्राउट, चूरा, पिलचर्ड और हिल्सा या भिंग शामिल हैं। इनके सीमित सेवन की वजह यह है कि इन मछलियों में प्रदूषक जैसे कि डाइआॅक्सिन और पी.सी.बी. (पॉलिक्लोरिनेटेड बाइफिनाइल्स) हो सकते हैं। ज्यादा लंबे समय तक ये आपके शरीर में संग्रहित हो जाते हैं।

ऐसे में, आप इन मछलियों को खा सकते हैं, लेकिन वह भी एक सिमित मात्रा में-

  • सी ब्रीम

  • टरबोट

  • हलिबेट (कुप्पा / जेडार)

  • डॉगफिश / रॉक सामन

  • एन्कोवी

  • हिलसा

  • छोटी समुद्री मछली

  • इंद्रधनुषी मछली

  • सैल्मन

  • सार्डिन

  • एक प्रकार की मोटी मछली

  • व्हाइटफ़िश

इन मछलियों का सेवन भूलकर भी न करें-

  • स्वोर्डफ़िश

  • शार्क

  • टाइलफिश

  • बांगड़ा

  • फ्रोजेन टूना

  • धारीदार बास

  • ब्लू फिश

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