गर्भावस्था के दौरान अस्थमा को न करें नजरअंदाज !

अस्थमा के दौरान लोगों को साँस लेने में तकलीफ होती है | Asthama ke dauran logon ko sans lene men takleef hoti hai.

अस्थमा के दौरान लोगों को साँस लेने में तकलीफ होती है, क्योंकि इस दौरान स्वांस की नली में सूजन आ जाती है, जिससे कि यह सिकुड़ जाती है। और नतीजा यह होता है कि आपको साँस लेने में कठिनाई होती है। इतना ही नहीं, यदि आप सांस अच्छे तरीके से नहीं लेती हैं तो इससे शरीर के कुछ अंगो को ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद भी हो सकती है।

अब बात यह आती है कि क्या गर्वावस्था में अस्थमा का प्रभाव कितना घातक है और बच्चे पर अस्थमा के प्रभाव को कैसे कम कर सकते हैं। क्योंकि जरूरी नहीं की अस्थमा सिर्फ बड़े लोगों को हो ये गर्भ में पल रहे बच्चे या समय से पहले जन्म लेने वालों बच्चों में भी हो सकता है। ऐसे में बच्चे पर अस्थमा के प्रभाव को कम करने के कुछ तरीके हैं, जिसके जरिए इस पर काबू पाया जा सकता है-

अस्थमा पर निगरानी रखें

सबसे पहले अस्थमा पर नियंत्रण रखने के लिए एक योजना बनाएं, और उस पर नजर रखें। साथ ही अपने अस्थमा की दवा की मात्रा को निर्धारित करें कि कितनी मात्रा में और कितनी बार लेना है।

अस्थमा के ट्रिगर्स को पहचानें-

अस्थमा पर नजर रखने के लिए इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि यह कब आप पर हावी होता है। साथ ही किस समय इससे आपकी हालत ख़राब होती है, इसके लिए एक डायरी रखें और इसे नोट करें। साथ ही इस से निपटने के तरीके भी ढूंढें।

डॉक्टर से बातचीत करें-

अपने डॉक्टर से इस विषय में जरूर बात करें कि क्या अस्थमा आप और आपके बच्चे को नुकसान पहुँचा सकता है। साथ ही इससे बचने के उपाय के बारे में भी बात करें ताकि आगे चलकर कोई कठिनाई उत्पन्न न हो।

आमतौर पर, यह बिल्कुल सच है कि अस्थमा गर्भावस्था को और भी खराब कर सकता है। हालाँकि, यह जरूरी नहीं  है कि अस्थमा का प्रभाव सारी गर्भवती महिलाओं में एक समान हो। कुछ में इसका प्रभाव कम तो किसी में ज्यादा देखने को मिलता है।

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