इन तरीकों से पता करें कि आपको समय से पहले प्रसव होने वाला है

समय से पहले प्रसव यानि कि 24 हफ़्तों से लेकर 37 हफ़्तों के बीच यदि बच्चे का जन्म होता है तो इसे प्री-मैच्योर डिलीवरी या समय से पूर्व प्रसव कहा जाता है। हालाँकि, इन हफ़्तों के बीच बच्चे जन्म के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होते, और अगर वह जन्म ले भी लेते हैं तब उन्हें इस बाहरी दुनिया में बहुत अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, बच्चा जितनी जल्दी पैदा हो जाता है, उसमें शारीरिक और मानसिक तौर पर अक्षम होने की आशंका भी उतनी ही ज्यादा होती है।

समय से पहले जन्में बच्चों में क्या समस्या हो सकती है ?

  • शारीरिक विकलांगता

  • मानसिक विकास में कमी

  • आटिज्म का खतरा

  • मानसिक विकलांगता

  • सेरेब्रल पाल्सी फेफड़ों की समस्या

  • देखने और सुनने से सम्बंधित समस्याएं

इसके अलावा, बच्चे का जन्म समय से जितना पहले होता है, तो उसे उतने ही अधिक समय तक एनआईसीयू (NICU)में रखा जाता है।

प्री-मैच्योर डिलीवरी होने के कारण

  • प्लेसेंटा में किसी तरह की समस्या होने पर

  • गर्भ में एक से अधिक बच्चे का होना

  • गर्भाशय या सर्विक्स (श्रोणि) में किसी तरह की कोई समस्या होने पर  

  • यदि गर्भवती महिला को संक्रमण हुआ हो

  • एमनियोटिक द्रव की थैली का फटना

  • एक या उससे अधिक बार गर्भपात का होना

  • शराब आदि का सेवन करने से

  • गर्भावस्था के दौरान अत्याधिक रक्तस्त्राव का होना

  • किसी वजह से माँ के पेट पर चोट लगने से

कैसे पता करें कि मुझे समय से पहले प्रसव होने वाला है ?

जैसे ही आपको पता चलेगा कि आपको समय से पहले बच्चे को जन्म देना है, आप बहुत अधिक डर सकती हैं। लेकिन, हालाँकि, एक शोध में गर्भवती महिलाओं में प्रीमेच्योर बर्थ का अनुमान लगाया जा सकता था। यह टेस्ट इस प्रकार डिज़ाइन किये गए थे जिनमें गर्भवती महिला के सर्विक्स की घनता से प्रीमेच्योर बर्थ के खतरे का अनुमान लगाया जा सकता है। इस दौरान यह देखा जा सकता है कि सर्विक्स का मुंह खुला तो नहीं है। क्योंकि, यह गर्भावस्था के अंत तक बंद रहता है। यदि सर्विक्स पतला और कम घना होने लगे तो इसके कारण प्रीमेच्योर बर्थ की समस्या हो सकती है।

इसके अलावा, डॉक्टर आपकी बहुत मदद करेंगें, और साथ ही प्रसव की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान आपके शिशु के दिल की धड़कन का निरीक्षण किया जाएगा। अगर, आपको दर्द में कुछ राहत चाहिए, तो शायद आपको एपीड्यूरल दी जाएगी, क्योंकि इससे शिशु को कोई नुकसान नहीं होता है।

आमतौर पर, इस समस्या को बढ़ाने में बहुत हद तक गलत लाइफस्टाइल का भी प्रभाव है, जैसे कि गर्भवती महिला द्वारा स्वस्थ आहार न लेना, गर्भावस्था के दौरान वज़न न बढ़ना, मां की मेडिकल हिस्ट्री, अवसाद, तनाव, डाइबिटीज, मोटापा, धूम्रपान, शराब आदि कई प्रमुख कारण हैं। यदि गर्भवती महिला गर्भावस्था के दौरान आवश्यक सावधानियां नहीं बरतती है तो वह समय से पूर्व बच्चे को जन्म दे सकती हैं।

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