इमरजेंसी सी-सेक्शन: जानिए ये ख़ास बातें

हो सकता है कि आपने गर्भावस्था के शुरुआत से ये सोच कर रखा होगा कि आपको नार्मल डिलीवरी होगी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से मेडिकल कॉम्प्लीकेशन्स की वजह से डॉक्टर ने आपको ऑपरेशन के संकेत दे दिए हों। ऐसे में चिंता न करें, बच्चे के सही तरीके से जन्म लेने के लिए ये बहुत जरुरी होता है। हालाँकि इसमें खर्चा थोड़ा ज्यादा होता है लेकिन आपकी और बच्चे की लाइफ सेव रहती है।

इमरजेंसी में किया जाने वाला सी-सेक्शन, एक मेजर आपरेशन होता है जिसमें डॉक्टर, गर्भवती महिला के पेट पर यूट्रस वाली जगह पर कट लगाते हैं और बेबी को बाहर निकाल लेते हैं। अगर आप खुद को इमरजेंसी सी-सेक्शन के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं करेगी तो आपको ज्यादा मानसिक दिक्कत होगी और इससे आपरेशन में बाधा आ सकती है।

इमरजेंसी सी-सेक्शन को निम्न स्थितियों में किया जाता है:

  • प्रेगनेंसी का समय पूरा हो जाने के बाद भी प्रसव पीड़ा न होना।
  • प्रसव पीड़ा होने के बाद, पुश करने पर भी बेबी का न निकलना और बेबी को तनाव होना।
  • बर्थ कैनाल में अम्बिलिकल कॉर्ड का फँस जाना।
  • गर्भाशय में चोट लग जाना या कोई आंतरिक समस्या होना।

कई बार गर्भावस्था के कुछ ही समय बाद आपको पता चल जाता है कि आपको सी-सेक्शन करवाना पड़ेगा, ऐसे में आपको मानसिक रूप से तैयार होने में काफी समय मिल जाता है।

सी-सेक्शन करने से पहले डॉक्टर आपको कुछ इस प्रकार ट्रीट करता है :

  • सबसे पहले आपसे एग्रीमेंट लिया जायेगा कि आप इस आपरेशन के लिए तैयार हैं और आपको किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है।
  • इसके बाद, आपका ब्लड प्रेशर चेक किया जायेगा और आपके शरीर में खून की मात्रा भी चेक की जाएगी। एनीमिया से ग्रसित महिलायों के लिए खून का इंतजाम भी इसी टेस्ट के आधार पर किया जाता है।
  • घबराहट की वजह से गिरने वाले ब्लड प्रेशर को रोकने के लिए ड्रिप लगायी जाती है।
  • नीचे के शरीर को सुन्न करने के लिए एनस्थीसिया दे दिया जाता है।
  • यूरिनरी ब्लेडर को खाली करने के लिए कैथेडर को लगाया जाता है।
  • संक्रमण होने से रोकने के लिए एंटीबायोटिक दी जाती है।
  • अब डॉक्टर, चीरा लगाता है और आपके बेबी का जन्म हो जाता है।  

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