कोलोस्ट्रम के बारे में जानिए ये बातें

कोलोस्ट्रम, मेमरी ग्रंथियों के द्वारा स्त्रावित होने वाला पहला दूध होता है। गर्भवती महिला के स्तनों में इसका निर्माण शुरुआत के 3 महीने से ही होने लगता है। प्रेगनेंसी के अंतिम हफ्ते में कई महिलायों को कोलोस्ट्रम लीक होने लगता है।

ये बहुत ज्यादा मात्रा में नहीं बनता है, लेकिन इसका सेवन बच्चे के लिए बहुत लाभकारी होता है। इस मिल्क में एंटीबॉडीज और इम्मुनोग्लोब्यूलिंस की भरमार होती है। इससे बच्चे के शरीर को उम्र भर के लिए प्रतिरोधक क्षमता मिलती है। नवजात के शरीर को इससे निम्न लाभ मिलते हैं:

  • बेबी इसको फीड करने के बाद आसानी से पचा सकता है।
  • ये मिल्क, बच्चे के पेट को ब्रेस्ट मिल्क पचाने के लिए तैयार कर देता है।
  • इसमें लयूकोसाइट्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है जो बच्चे के शरीर को बैक्टीरिअल और वायरल इन्फेक्शन से लड़ने के लिए शक्तिशाली बना देता है।
  • इसमें कैल्शियम, जिंक, विटामिन ए, विटामिन बी6 जैसे आदि पोषक तत्व होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक विकास में सहायक होते हैं।

 

जैसे-जैसे आपका बेबी बड़ा होता जाता है, कोलोस्ट्रम, ब्रैस्ट मिल्क में बदलता जाता है और उसके सेवन से बच्चे का पेट भर जाता है। प्रसव के तुरंत बाद बच्चे को कोलोस्ट्रम का सेवन करवाने के लिए ब्रैस्ट फीड करवाये जाते हैं। कई बार जब बच्चे इसे सही से नहीं पी पाते हैं तो उन्हें फोहे से इसे पिलाया जाता है।  

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