सी-सेक्शन से पहले क्या सोचती हैं महिलाएं ?

इसमें कोई शक नहीं है सिजेरियन का नाम सुनकर ही डर लगने लगता है। क्योंकि, यह एक बड़ा ऑपरेशन होता है जिसमें महिला के पेट में चीरा लगाया जाता है। हालाँकि, देखा जाए तो डॉक्टर गर्भवती महिला की परिस्थिति को देखते हुए सी-सेक्शन का निर्णय लेते हैं। खासकर जब आपको गर्भवस्था से संबंधित कुछ जटिलताएं हों या फिर इन में से कुछ समस्याएं उत्पन्न होने पर-

  • जब आप आपका बच्चा उल्टा पोजीशन में हो

  • प्रसव के समय बच्चे का हार्ट बीट न मिल पाना

  • बहुत अधिक रक्तस्राव होने पर

  • या फिर गर्भाशय में सिस्ट का होना आदि भी इसके लिए ज़िम्मेदार हो सकता है।

इसके अलावा, कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो अपनी मर्जी से सी-सेक्शन कराती हैं।

सी-सेक्शन से पहले क्या सोचती हैं महिलाएं ?

जैसे ही आपको पता चलता है कि अब आपको सिजेरियन के जरिए बच्चे का जन्म कराया जाएगा। तब आपके मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं, जैसे कि-

  • कितना दर्द होगा ?

  • कितने समय के लिए बेहोश रहेंगे ?

  • बच्चे को कोई नुकसान तो नहीं होगा आदि जैसी कई चीज़ें आपके मन में चल रही होती हैं।

सिजेरियन से पहले क्या होता है ?

जैसे ही डॉक्टर आपको बताते हैं कि आपका नॉर्मल डिलीवरी संभव नहीं है, तब आपके ऑपरेशन की तैयारी शुरू हो जाती है। हालाँकि, इससे पहले डॉक्टर आपको और आपकी फैमली को सारी बातें समझाते हैं, ताकि कोई संदेह न हो। इसके बाद आपको ऑपरेशन के लिए पूरी तरीके से तैयार किया जाता है, जैसे कि-

  • आपको बेहोशी की दवा या एनेस्थेसिया दी जाएगी, या फिर हो सकता है कि आपको एपीड्यूरल जो रीढ़ की हड्डी में दिया जाता है वो भी दिया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से आपके शरीर का निचला हिस्सा सुन्न हो जाता है। अगर देखा जाए तो सामान्य एनेस्थीसिया की तुलना में यह आप और आपके शिशु के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • इसके अलावा, एक पतली ट्यूब या नलिका (कैथेटर) आपके मूत्रमार्ग के जरिये मूत्राशय में घुसाई जाएगी। इससे आपके मूत्राशय को पूरी तरह खाली कर दिया जाता है।

  • पेट के जिस हिस्से पर चीरा लगाया जाता है, उस जगह को अच्छे एंटीसेप्टिक की मदद से साफ किया जाता है।

  • इसके अलावा, डॉक्टर आपके ब्लड प्रेशर पर भी नजर रखते हैं।

कैसे किया जाता है सी-सेक्शन ?

जब आपके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह से सुन्न हो जाता है, तो डॉक्टर आपके प्यूबिक बोन के ऊपरी हिस्से में चीरा लगाते हैं। इसके बाद डॉक्टर एक दूसरा चीरा गर्भाशय के निचले भाग में लगाते हैं। उसके बाद आपको अचानक तेजी से तरल पदार्थ बहने की आवाज सुनाई दे सकती है। इसके बाद शिशु को निकाला जाता है। उसके बाद आपको शिशु को दिखाया जाता है। शिशु के जन्म के बाद, डॉक्टर हल्के से गर्भनाल को खींचेगी, ताकि प्लेसेंटा बाहर आ सके।

उसके बाद आपके डॉक्टर चीरे पर टांके लगाते हैं। इसके लिए वह मांसपेशियों और त्वचा की हर परत को चिमटी, स्टेपल या धागे से टांके लगाकर बंद करते हैं। इतना ही नहीं, डॉक्टर गर्भाशय को सिलने के लिए शायद दोहरे टांके लगाएंगी। अंत में, आपकी त्वचा के घाव को टांकों या स्टेपल के जरिये बंद कर दिया जाता है।

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