बच्चे की चिंता करें, न कि उसके लिंग की

जैसे ही लोगों को यह पता चलता है कि आप प्रेगनेंट हैं, वैसे ही लोग आपसे यह पूछना शुरू कर देते हैं कि आपको लड़का चाहिए या लड़की, या फिर आपको लड़का होगा या लड़की। यही नहीं कई तो आपकी स्थिति और आदतों के आधार पर खुद ही भविष्यवाणी भी कर देते हैं, कि आपके घर आने वाला मेहमान, लड़का होगा या लड़की।

लोग, आपके सोने, उठने बैठने, खाने-पीने, आपके पेट का आकार, मॉर्निंग सिकनेस, आपके चेहरे पर चमक आदि बातों को देख कर भी भविष्यवाणी कर देते हैं कि आपकी होने वाली संतान क्या होगी। सच्चाई यही है कि इस तरह की दकियानूसी बातों पर यकीन करना नासमझी से ज्यादा और कुछ भी नहीं है। यह बेतुकी और आधार रहित बाते हैं।

बेहतर होता है कि यदि प्रेगनेंसी में, लिंग की चिंता से ज्यादा बच्चे के स्वास्थ्य की चिंता की जाए। किसी भी तरह की अंधविश्वासी बातों पर यकीन न करें। सच तो ये है कि देश में, लिंग जांच पर क़ानून ने रोक लगा दी है ऐसे में, लोग अंधविश्वासी बातों के द्वारा लड़का या लड़की होने की झूटी तसल्ली का सहारा और ज्यादा लेने लगे हैं।  

आप भी, बच्चे के लिंग के बारे में सोचने के बजाय उसके स्वास्थ्य के बारे में ही सोचें क्योंकि, कानूनी रोक के बाद जब आप बच्चे के लिंग का पता नहीं लगा सकती तो भला इसके बारे में चिंता करने से क्या फायदा।

साथ ही, जिन माता-पिताओं को पहले से लड़का या लड़की जो भी है, और उन्हें अगले बच्चे से उम्मीद है कि वह लड़का होना चाहिए या लड़की होनी चाहिए और जब ऐसा नहीं हो पाता तो उन्हें निराशा होती है।  

आपके लिए एक बात को समझना जरूरी है कि बच्चे का लिंग चाहे जो भी जो, वह बच्चा आपका ही होगा। आपके चिंता करने से उसके लिंग पर तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा, हाँ आप अपना और बच्चे का स्वास्थ्य जरूर खराब कर लेंगी। इसीलिए, बगैर यह सोचे कि आने वाला बच्चा लड़का होगा या लड़की आप उसके स्वागत की तैयारी करें।

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