बी पॉजिटिव: एक्टोपिक प्रेगनेंसी को न तोड़ने दें अपना मनोबल

जब भूर्ण (एम्ब्रोय) का विकास, यूटरस के बजाए फेलोपियन ट्यूब में हो जाता है, तो इसे एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहा जाता है। ऐसा 50% प्रेगनेंसी में से, किसी एक के साथ ही होता है। यह प्रेगनेंसी, नोरमल प्रेगनेंसी नहीं होती। इसलिए अक्सर, इस तरह के मामलों में, प्रेगनेंसी टर्मिनेट (गर्भपात) कर दिया जाता है।  

क्यों होती है एक्टोपिक प्रेगनेंसी?

प्रेगनेंसी की सामान्य प्रक्रिया में, अंडा फर्टिलाइज होने के बाद, फैलोपियन ट्यूब से होते हुए, यूटरस तक पहुंच जाता है। लेकिन यदि, फेलोपियन ट्यूब क्षतिग्रस्त हो जाये या ब्लॉक हो जाये या अंडा गर्भाशय तक जाने में असफल हो जाये तो अंडा ट्यूब में ही इम्प्लांट हो जाता है और वही पर विकसित होने लगता है। इस अवस्था को ही एक्टोपिक प्रेगनेंसी कहा जाता है।

यदि एक्टोपिक प्रेगनेंसी की समय पर पहचान नहीं हो पाती और इसका इलाज नहीं होता तो गर्भ का विकास वही ट्यूब के अंदर ही होने लगता है। जिस कारण, फैलोपियन ट्यूब टूट भी सकती है। फैलोपियन ट्यूब के टूटने से, प्रेग्नेंट वीमेन को पेट में बहुत ज्यादा दर्द और ब्लीडिंग होती है। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कारण, ट्यूब को परमानेंट डैमेज हो सकता है। कभी-कभी तो, ट्यूब को बहुत ज्यादा नुक्सान होता है। यदि लेडी को बहुत ज्यादा, इंटरनल ब्लीडिंग हुई हो और उसका ठीक तरह से ट्रीटमेंट भी नहीं हुआ हो, तो यह जान लेवा भी हो सकता है। इसलिए इस तरह की प्रेगनेंसी में, जितनी जल्दी इसकी पहचान हो जाये और सही ट्रीटमेंट और फॉलोअप केयर हो तो इससे निपटा जा सकता है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी की जाँच?

प्रेगनेंसी की शुरुआत में, एक्टोपिक प्रेगनेंसी की पहचान करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसका पता आठ से नौवें हफ्ते में ही लग पाता है। यदि आपमें, एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण दिख रहे हों तो डॉक्टर, इसे कन्फॉर्म करने के लिए, आपका अल्ट्रासाउंड और ब्लड टेस्ट कर सकते हैं।  

यदि किसी लेडी की पहली प्रेगनेंसी, एक्टोपिक प्रेगनेंसी रही है, तो क्या बाद में उसे नार्मल प्रेगनेंसी हो सकती है?

हां बिलकुल, पहली एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बाद, नार्मल प्रेगनेंसी हो सकती है। बशर्ते कि शुरुआत में ही एक्टोपिक प्रेगनेंसी को समाप्त कर दिया गया हो।  जितनी जल्दी इसे ख़त्म कर दिया जाये, उतना ट्यूब को नुक्सान होने से बचाया जा सकता है और आराम से सेकंड बेबी प्लान किया जा सकता है। यदि इस कारण से, आपकी एक ट्यूब को नुक्सान हुआ है, तो भी बिना किसी फर्टिलिटी प्रोसीजर के आप दोबारा से माँ बन सकती हैं।

अबोर्शन के गम से बाहर निकलें

हो सकता है कि एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कारण, अपने बेबी को खोने के गम से आप उबार नहीं पा रही हों। अबॉरशन के बाद, दोबारा प्रेग्नेंट होना भी काफी कठिन होता है, क्योकि आप इमोशनली भी काफी कमजोर हो जाती हैं। दोबारा फिर से, अपने बेबी को खोने का डर, आपके मन में बना रहता है। साथ ही, कभी-कभी एक्टोपिक प्रेगनेंसी को टर्मिनेट करने के लिए, कुछ मेजर सर्जरी भी की जाती हैं, जिससे आपको थकान या कमजोरी महसूस हो सकती है। साथ ही हॉर्मोन में उथल-पुथल होने के कारण भी, आप डिप्रेस हो सकती है। इसलिए अपने आपको को थोड़ा समय दें। फिजिकली और इमोशनली, दोनों तरह से स्ट्रांग बने और लगभग तीन महीनों के बाद ही, दोबारा माँ बनने की कोशिश करें। आपके डॉक्टर भी आपको यही सलाह देंगे।

loader