“अपनी प्रेगनेंसी के अनुभवों में पति को भी करें शामिल”

जैसे ही आपका बच्चा आपके गर्भ में आता है, आप प्रेगनेंसी के सभी लक्षणों (अच्छे और बुरे) का अनुभव करती हैं। अलग-अलग दौर से गुजरती हैं। चाहे वह डॉक्टर से अपॉइंटमेंट हो, अल्ट्रासाउंड हो या बच्चे का बेबी शावर ही क्यों न हो। ऐसे में, यदि आपके पति  आपके इन सभी अनुभवों में शामिल नहीं होते, तो शायद आपको यह लगे कि उन्हें जानकारी नहीं है इसीलिए ऐसा है। या फिर ऐसा भी हो सकता है कि आपको तब अहसास हो, जब बच्चा घर में आ जाएँ, और रात में उन्हें बच्चे की नैप्पी बदलनी पड़े, तब आपको शायद यह एहसास हो।

ऐसे में, यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताए जा रहे हैं, जिनके जरिए आप अपने पति को प्रेगनेंसी में शामिल कर सकती हैं-

  • जब आप अपने परिवार के सामने अपनी प्रेगनेंसी के बारे में बताएं, तो उसमें अपने पति को जरूर शामिल करें।
  • अपने डॉक्टर का अपॉइंटमेंट अपने पति के होने पर ही रखें, ताकि आपके पति को यह एहसास हो कि उनका उपस्थित रहना कितना जरूरी है।
  • अल्ट्रासाउंड के लिए भी पति को साथ लेकर जाएँ, दोनों साथ में बच्चे को देखें और उसकी हार्ट बीट सुनें। जिससे आपको अपने बच्चे की उपस्थिति, उसकी धड़कन को महसूस करने का मौका मिले। यकीन मानिए अपने बच्चे की हार्टबीट सुनकर अनायास ही आपकी बॉन्डिंग उसके साथ स्ट्रांग बॉन्डिंग हो जाएगी।  
  • बच्चे की किक को अपने पति को भी महसूस कराएं।  
  • अपने पति से बेबी के लिए गाना, गाने के लिए कहें।  ऐसा करने से बच्चे अपने डैडी की आवाज को पहचानेगा और बॉन्डिंग अच्छी होगी।
  • अपने पति को बेबी शावर में शामिल होने के लिए कहें। ताकि दोनों मिल कर इस पल को एन्जॉय और सेलिब्रेट कर सकें।
  • बच्चे के बारे में, अपने पति की राय और विचार को जरूर सुनें। ताकि उन्हें भी लगे कि वह उनकी भी जिम्मेदारी है, भले ही 9 महीने वह आप ही के गर्भ में न रहा हो।

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