एमनियोटिक द्रव के कम होने पर क्या करें ?

एमनियोटिक द्रव एक ऐसा तरल पदार्थ होता है, जो गर्भ में बच्चे को पोषण के साथ-साथ उसे बाहरी क्षति एवं दबाव से सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, यह बच्चे के तापमान को नियंत्रित करता है, क्योंकि बच्चे का विकास गर्भावस्था के समय हमेशा होता है, ऐसे में उसके तापमान को नियंत्रण में रखना बेहद जरूरी होता है।

हालाँकि, गर्भावस्था के 37 वें हफ्ते में आपके शरीर में एमनियोटिक द्रव की मात्रा 800-1000 मिलीलीटर होनी चाहिए। शरीर में एमनियोटिक द्रव के स्तर की जाँच एमनियोटिक द्रव सूचकांक से की जाती है। यदि एमनियोटिक द्रव 5% से कम होता है, तो इसे ओलिगोहाइड्रामनियोस कहा जाता है, जिसका उपचार जल्द से जल्द किया जाना चहिये। इस तरह की समस्या ज्यादातर गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में होता है। यदि इसका उपचार समय रहते न किया जाए तब यह बहुत बड़ी समस्या खड़ा कर सकता है।

एमनियोटिक द्रव के कम होने से क्या होता है?

  • बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में बाधा उत्पन कर सकता जिससे कि बच्चे कमजोर हो सकते हैं।

  • फेफड़ों के विकास को प्रतिबंधित करता है।

  • एमनियोटिक द्रव के कम होने से गर्भाशय में अतिरिक्त दबाव उत्पन होता है, जिससे  चेहरे, हड्डियों, माँसपेशियों आदि के विकास में बाधा उत्पन्न हो सकता है।

  • समय से पहले डिलीवरी और गर्भपात का खतरा रहता है।

  • एमनियोटिक द्रव में कमी होने के कारण बच्चे को साँस लेने में मुश्किल हो सकती है।

कम एमनियोटिक द्रव के मामले में क्या करना है?

  • खुद को जितना हो सके हाइड्रेटेड रखें, इसके लिए आप पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें।

  • बहुत अधिक तनाव न लें, क्योंकि इससे प्रीमैच्यौर बर्थ का खतरा रहता है।  

ऐसे में खुद को जितना हो सके हाइड्रेटेड रखें, क्योंकि अतिरिक्त तरल पदार्थ   गर्भावस्था की जटिलताओं को कम करने में मदद करता है।

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