अगर आप चाहती हैं नॉर्मल डिलीवरी तो जरूर ट्राय करें बाबा रामदेव के ये आसान नुस्ख़े

हर महिला की यह चाहत होती है कि उसका बच्चा सामान्य प्रसव के जरिए पैदा हो। क्योंकि, आजकल डॉक्टर बिना इंतज़ार किए तुरंत सी-सेक्शन करने की सलाह देते हैं। हालाँकि, सिजेरियन में भले ही आपको लेबर पेन का अनुभव न हो, लेकिन इसे ठीक होने में कई महीने लग जाते हैं। क्योंकि, इसके बाद जो कष्ट महिलाएं को होती हैं वह काफी तकलीफदेह होती हैं। ऐसे में, अगर आप सच में चाहती हैं कि आपका बच्चा नॉर्मल डिलीवरी से पैदा हो, तो इसके लिए आप बाबा रामदेव के बताए इस नुस्खे को जरूर फॉलो करें, जिनमें निम्न शामिल हैं-

प्राणायाम

यह हर मामले में सही होता है, लेकिन इसका करने का तरीका बिल्कुल सही होना चाहिए, इस लिए निचे कुछ प्रायाणाम के नाम आपको बताए जा रहे हैं जिसको ध्यान में रख कर आप इसे कर सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं-

अनुलोम-बिलोम

1. अपने दाहिने हाथ के अंगूठे के साथ दाहिने नथुने को बंद करें। बाएँ नथुने से श्वास लें। श्वास धीरे-धीरे लें – मन में पाँच तक की गिनती करें। बायाँ हाथ बायें घुटने पर टिका होना चाहिए, इस हाथ से चिन मुद्रा बना कर रखें।

2. अब दाहिने नथुने को छोड़ दें, हाथ की रिंग फिंगर से बायें नथुने को बंद कर लें। पाँच की गिनती करते हुए बायें नथुने से श्वास छोड़ें।

3. यह पूरा हुआ एक तरफ का क्रम।

4. अब बायें नथुने से पाँच तक की गिनती करते हुए श्वास लें। फिर इस नातुने को छोड़ दें और दाहिने नथुने को बंद करें और उस से श्वास छोड़ें।

5. यह पूरा हुआ एक क्रम अनुलोम-विलोम प्राणायाम का।

भ्रामरी

इस प्राणायाम को करते वक्त व्यक्ति बिल्कुल मधुमक्खी की तरह ही गुंजन करता है, इसलिए इसे भ्रामरी प्राणायाम कहते है। करने का तरीका-

1. अपने दोनों हाथों को बगल में अपने दोनों कंधों के समांतर फैला लें, और फिर अपनी कोहनियों को मोड़ कर हाथों को अपने कानों के पास ले आयें। फिर अपनें दोनों नेत्रों (आँखों) को बंद कर लें|

2. उसके बाद अपने हाथों के दोनों अँगूठों से अपने दोनों कान बंद कर दें। (Note- भ्रामरी प्राणायाम करते वक्त कमर, गरदन और मस्तक स्थिर और सीधे रखने चाहिए)।

3. अब अपने दोनों हाथों की पहली उंगली को आँखों की भौहों के थोड़ा सा ऊपर लगा दें। और बाकी की तीन तीन उँगलियाँ अपनी आंखों पर लगा दीजिये।

4. अपने दोनों हाथों को ना तो अधिक दबाएं और ना ही एक दम फ्री छोड़ दें। अपने नाक के आस-पास दोनों तरफ से लगी हुई तीन-तीन उँगलियों से नाक पर हल्का सा दबाव बनायें।

5. दोनों हाथों को सही तरीके से लगा लेने के बाद अपने चित्त (मन) को अपनी दोनों आंखों के बीछ केन्द्रित करें। (यानि की अपना ध्यान अज्न चक्र पर केन्द्रित करें)।

6. और अब अपना मुह बिल्कुल बंद रखें और अपने नाक के माध्यम से सामान्य गति से सांस अंदर लें| फिर नाक के माध्यम से ही मधु-मक्खी जैसी आवाज़ करते हुए सांस बाहर निकालें। यह अभ्यास मुह को पूरी तरह से बंद कर के ही करना है)।

7. सांस बाहर निकालते हुए अगर “ॐ” का उच्चारण किया जाए तो इस प्राणायाम का लाभ अधिक बढ़ जाता है।

बटरफ्लाई

गर्भावस्था में महिलाएं इस आसन को कर सकती हैं, लेकिन धायण रहे बहुत धीरे-धीरे करना है।

1. पैरों को सामने की ओर फैलाते हुए बैठ जाएँ,रीढ़ की हड्डी सीधी रहे।

2. घुटनो को मोड़ें और दोनों पैरों को श्रोणि की ओर लाएँ,पाँव के तलवे एक दुसरे को छूते हुए।

3. दोनों हाथों से अपने दोनों पाँव को कस कर पकड़ लें। सहारे के लिए अपने हाथों को पाँव के नीचे रख सकते हैं।

4. अब तितली के पंखों की तरह दोनों पैरों को ऊपर नीचे धीरे-धीरे हिलाना शुरू करें।

चिरचिटा (अपामार्ग) का प्रयोग

यह एक तरह का पौधा होता है जिसमें छोटे-छोटे काटे होते हैं। इसके जड़ को नौवें महीने में जब महिला को प्रसव पीड़ा हो रही हो तब नाभि के पास रखने से नॉर्मल डिलवरी होती है। बाबा रामदेव का मानना है कि इससे 99 प्रतिशत तक नार्मल डिलवरी के चांसेस बढ़ जाते हैं।  

इसके अलावा, गायत्री मंत्र का जाप भी बेहद फायदेमंद माना जाता है।

Information source: YouTube

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