प्रसव के बाद, एकांतवास की रस्म

कई पीढ़ियों से, हमारे भारतीय समाज में एक ऐसी परंपरा है कि, माँ और बच्चे को एक सिमित समय के लिए, घर से बाहर निकलना मना होता है। हालाँकि, ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि बेबी को इन्फेक्शन होने खतरा रहता है। ऐसे में बेबी को इन्फेक्शन से बचाने और साथ ही माँ को आराम करने के लिए, ऐसा किया जाता है। सच तो यह है कि कनफिनमेंट का समय, हर समुदाय और क्षेत्र के लोगों के लिए, अलग-अलग होता है।

कोई भी लेडी, एकांतवास अवधि का पालन तभी कर सकती है, जब उसे परिवार के सदस्यों का सहयोग हासिल हो। इन पारंपरिक एकांतवास प्रथाओं का पालन, संयुक्त परिवारों में रहने वाली महिलाओं या फिर, अपने माता-पिता के घर जाकर डिलीवरी कराने वाली महिलाओं को, अधिक करना होता है।

पारंपरिक तौर पर, एक नई माँ के लिए, एकांतवास की अवधि में कई पाबंदियां होती हैं। शिशु के जन्म की थकान से उबरने के लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं, ये पाबंदियां इन्हीं मान्यताओं पर आधारित हैं। यदि आपको इनमें से कुछ प्रतिबंधो का पालन करने में कठिनाई हो रही है, तो अपने परिवार के सदस्यों से बात कर सकती हैं।

loader