क्यूँ बच्चों पर हाथ उठाना होता है ग़लत?

Published On  March 24, 2015 By
बच्चों पर हाथ उठना है ग़लत- पेरेंटिंग रीसॉर्सिज़ बाइ ज़ेनपेरेंट

बचपन से ही मेरे माता-पिता ने हम सब बच्चों की परवरिश बहुत ही अच्छे तरीके से करी| दुनिया में कोई भी माँ-बाप ऐसा नहीं जो अपने बच्चों की भलाई नहीं चाहते|

कई बार हम बिना सोचे-समझे अपनी ही औलाद पर हाथ उठा देते हैं और सोचते हैं की अगर बच्चा प्यार से बात नहीं सुन रहा तो शायद डाँट से या थप्पड़ से समझ जाएगा|

मुझे याद है जब भी मेरे माता-पिता ने मुझे मारा, भले ही मेरी भलाई के लिए, तब भी वो मार कहीं ना कहीं मेरे मन में छाप छोड़ गई| मैं अक्सर यही सोचती की जब मेरे बच्चें होंगें तब मैं कभी भी उनपर हाथ नहीं उठाऊंगी| जानिए क्यूँ-

No spank parenting

सोर्स: डॉलर फोटो क्लब

  • बच्चों को मार खाना लगता है अपमानित

हम अक्सर समझ नहीं पाते की बच्चे भी बेज़ती महसूस करतें हैं| मुझे भी इस भाव का पहला एहसाह बचपन में अपनी माँ से मार खाते समय हुआ था| और काफ़ी दिनों तक मार से ज़्यादा मुझे मार खाने पर महसूस हुई बेबसी याद रही| अपने बच्चे को इसी असहायता से दूर रखना आवश्यक है क्योंकि इन नन्हे बच्चों के कोमल मन पर ऐसा बुरा असर उनको या तो अशांत या डरा हुआ बना सकता है|

  • बच्चों को मारना उनकी भलाई के लिए कभी नहीं होता

ये सोचना ग़लत है की बच्चों को मारना उनके हित में होता है| क्योंकि आपका गुस्सा या विवशता का परिणाम अपने बच्चे पर हाथ उठाने के रूप में निकलता है| उनको मारने के बजाए आपको शांति से ये जानने की कोशिश करनी चाहिए की आख़िर किस बात से आपका बच्चा आपकी बात नहीं मान रहा या क्या बात उसको परेशान कर रही है| इस मूल कारण का हल निकालना ज़रूरी है ना कि अपने बच्चे को मारना|

  • मारने से बच्चों को अच्छे-बुरे में अंतर महसूस नहीं होता

यदि आपको लगता है कि बच्चों को सही या ग़लत में अंतर मार कर समझाया जा सकता है तो आप ग़लत हैं| क्योंकि शायद वो पिटाई खा कर वो कार्य करना छोड़ दें जिसपर उनको मार पड़ी है लेकिन ये भी हो सकता है की वो झूट बोलना या उस बात को छुपाना शुरू कर दें जिस कारण उनको डाँट पड़ी है| बच्चों का झूट बोलना सीखना या माता-पिता से बातें छुपाना आपको उनसे और दूर कर सकता है|

  • बच्चे तो आख़िर बच्चें ही हैं

यदि हम बड़ों को कोई मारे तो हुमको कैसा लगेगा? यही सोचकर मैं आपको ये संदेश देना चाहती हूँ कि हुमारे बच्चे आख़िर हैं तो नन्ही से जान ही|

 Don't spank your kids!

सोर्स: क्रियेटिव कॉमन्स, गूगल इमएजिज़

उनकी मासूमियत को मार-पिटाई से अंजाने में कुचलें नहीं| क्योंकि बचपन में सीखी बातें ही बड़े होने तक याद रहतीं हैं| क्या पता? आपकी मार आपके बच्चों को बड़े होने पर उनको और गुस्से वाला और बात्तमीज़ बना दें…