शिशु के लिए ग्राइप वाटर कितना सुरक्षित है?

अक्सर नवजात में ग्राइप वाटर देने को लेकर मतभेद रहा है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसका उपयोग शिशु के लिए कितना फायदेमंद है। अगर नहीं, तो आज हम आपको बताएँगे कि शिशु को ग्राइप वाटर देने चाहिए या नहीं।

आमतौर पर देखा जाए तो नवजात शुरुआत के पांच से छह महीने पूर्ण रूप से माँ के दूध पर ही निर्भर रहते हैं। लेकिन, कुछ मामलों में उन्हें बीच-बीच में बाहरी चीज़ों की जरूरत पड़ती है। ऐसे में, कुछ माँ अपने बच्चे को स्तनपान के अलावा ग्राइप वाटर पिलाती हैं।

कब और कितनी मात्रा में शिशु को ग्राइप वाटर देने चाहिए ?

देखा जाए तो ग्राइप वाटर की बोतल पर दो हफ्ते या उससे बड़े बच्चे को ग्राइप वाटर देने की सलाह दी जाती है। लेकिन, शिशु को दिन में कितनी बार ग्राइप वाटर देने चाहिए इस बात की पुष्टि आप अपने डॉक्टर से करें।

बच्चों के लिए कितना फायदेमंद है ग्राइप वाटर ?

शिशु में निम्न कारणों से ग्राइप वाटर का प्रयोग फायदेमंद हैं, जो निम्न हैं-

गैस से छुटकारा

नवाजत में गैस की समस्या काफी देखने को मिलती है, जिससे कि उन्हें काफी तकलीफ होती है। ऐसे में, डॉक्टर शिशु को ग्राइप वाटर देने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें स समस्या से आराम मिल सके।

हिचकी की समस्या से छुटकारा

अक्सर आपने देखा होगा कि नवजात शिशु में हिचकी की समस्या होती है, जिसके लिए लोगों का मानना है कि यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब शिशु के पेट के आकार में वृद्धि होती है। तब ऐसा माना जाता है कि ग्राइप वाटर देने से शिशु में इस परेशानी से राहत मिलती है।

डीहाइड्रेशन से बचाव

जैसा कि हमनें ऊपर भी कहा है कि शिशु शुरुआत के छह महीने अपनी माँ के दूध पर निर्भर होते हैं। इसलिए, तब तक उन्हें बाहरी चीज़ें खाने-पीने के लिए नहीं दी जाती हैं। लेकिन, बहुत अधिक गर्मी के दौरान उनका मुंह और गला सूखने लगता है जिस दौरान उन्हें ग्राइप वाटर दी जाती है ताकि उनमें पानी की कमी को रोका जा सके।

दांत दर्द से छुटकारा

जब शिशु में नए-नए दांत निकलते हैं तब उन्हें काफी परेशानी होती है, जिसके कारण उन्हें दस्त और दांत दर्द की समस्या होती है। ऐसे में, लोगों का मानना है कि ग्राइप वाटर देने से दांत दर्द की समस्या से छुटकारा मिलता है।

आख़िरकार डॉक्टर क्यों ग्राइप वाटर न देने की सलाह देते हैं ?

अगर बात वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन की करें तब उन्होंने इस बात का सीधे तौर पर विरोध किया था कि शिशु को ग्राइप वाटर न दिया जाए। क्योंकि, शिशु को शुरुआत के छह महीने माँ का दूध दिया जाना चाहिए। ताकि शिशु को इसका असर पूरी उम्र मिल सके, क्योंकि स्तनपान शिशु को बहुत सी बिमारियों से बचाने का काम करता है।

दूसरी जो सबसे बड़ी समस्या है वह यह है कि ग्राइप वॉटर बनाने वाली कंपनीज़, शुगर (चीनी) का भरपूर इस्तेमाल करती है। जो कि शिशु के शरीर पर और आने वाले दाँतों पर बुरा असर डालता है।

इसलिए ग्राइप वाटर देने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर लें, कि आपके शिशु के लिए सही है या नहीं।

loader