शिशु इस तरह के ख़तरनाक फ़ूड के सेवन से पड़ते हैं सबसे अधिक बीमार

आमतौर पर, नवजात शिशु शुरुआत के छह महीने अपने माँ के दूध पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़े होने लगते हैं ठीक वैसे-वैसे उन्हें बाहरी आहार की जरूरत पड़ती है। ऐसे में, आपको अपने बच्चे के संतुलित आहार के बारे में ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लेकिन, जो सबसे जरूरी बातें हैं जिसका ध्यान आपको हमेशा रखने की जरूरत है और वह है कुछ ऐसे आहार के बारे में जो इस समय शिशु को नहीं दिए जाने चाहिए। क्योंकि, इस तरह के फ़ूड शिशु के लिए बेहद ख़तरनाक होते हैं, और तो और इसके सेवन से शिशु के बीमार होने का खतरा रहता है, जो निम्न हैं-

गैस बनाने वाले आहार

शिशु में गैस की समस्या बेहद आम बात है, हालाँकि, शिशु में इस तरह की समस्या आपके गलत खान-पान के कारण भी उत्पन्न होता है। इसके अलावा, इन दिनों शिशु के आहार में उन खाद्य पदार्थों को शामिल न करें जिससे कि उन्हें गैस की समस्या हो। जैसे कि दूध के साथ-साथ आम का सेवन। या फिर अधपके खाद्य पदार्थ आदि को देने से बचें क्योंकि, शिशु इन चीज़ों को नहीं पचा पाते हैं।

नमक

नमक इस उम्र में शिशु के किडनी इतने विकसित नहीं होते कि नमक जैसी चीजों को पचा सके। इसलिए बच्चों के खाने में नमक का प्रयोग ज्यादा मात्रा में न करें।

बासी या पहले से बना हुआ खाना

अपने शिशु को भूलकर भी रेडी मिल्स, पैक्ड थाली, नूडल्स, मैगी या फिर अधिक मात्रा में नमक और फैट युक्त पदार्थों को न दें। क्योंकि, इन खाद्य-पदार्थों को पचा पाने में शिशु का पेट पूर्ण रूप से तैयार नहीं होता है। हालाँकि, इस समय आप जो भी फ़ूड शिशु को दें उसमें नमक की मात्रा को जाँच लें। क्योंकि, इन दिनों शिशु को एक दिन में एक ग्राम से भी कम नमक दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, ऊपर से उनके खाने में नमक न मिलाएं।

डीप-फ्राई फ़ूड

इस उम्र में शिशु को भूलकर भी इन खाद्य-पदार्थों को न दें, जैसे कि फिंगर चिप्स, डीप तले हुए समोसे, पकोडा, टिक्की, कटलेट या चिप्स आदि को भूलकर भी न दें। क्योंकि, इसमें बहुत अधिक संतृप्त वसा होता है जो आपके शिशु के लिए काफी हानिकारक और उन्हें बीमार बना सकता है।  इसके जगह आप अपने बच्चे को उबले हुए आलू, मक्के या फिर बेक्ड की हुई चीज़ें दें।

मछली

कुछ मछलियों में पारा (मर्करी) का उच्च स्तर होता है, जो इस उम्र में शिशु के लिए सुरक्षित नहीं होता है। हालाँकि, कुछ ऑयली फिश प्रोटीन और ओमेगा -3 का एक बहुत बड़ा स्रोत है। ऐसे में, आप अपने बच्चे को साल्मन दे सकती हैं।

अंडे

इसमें कोई नई बात नहीं है कि शिशु को खाने से एलर्जी की समस्या होती है, खासकर कुछ पदार्थों को लेकर, जैसे कि अंडा। इसलिए, जब भी आप अपने बच्चे में अंडे की शुरुआत करें तब एलर्जी की जाँच जरूर कर लें और साथ ही उन्हें उबले हुए अंडे देने की कोशिश करें।

बंधगोभी या गोभी

अपने शिशु के आहार में वैसी सब्जियों को शामिल न करें जिससे कि उन्हें गैस और पेट दर्द की समस्या हो। खासकर, बंदगोभी और गोभी जैसी सब्जियां शिशु के पेट में गैस बना सकती हैं और दर्द पैदा कर सकती हैं। ये सब्जियां शिशु को तब खिलाएं जब उन्हें सॉलिड फूड खाने की आदत पड़ चुकी हो।

ऐसे में, आप जो भी खाद्य-पदार्थ अपने शिशु को दें उससे पहले खाने-पीने की चीजों के पैकेट पर लिखा विवरण ध्यान से पढ़ लें ताकि पहले से ही यह मालूम रहे कि जो बच्चे को खिलाने जा रही हैं उस में कोई ऐसा तत्त्व नहीं है जिस से उसे एलर्जी हो।

देखा जाए तो इस समय आप अपने शिशु को दाल का पानी, सूजी की खीर, जूस आदि दे सकती हैं। क्योंकि, इस समय शिशु साइन खाद्य-पदार्थों को आसानी से पचा लेते हैं।

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