पेरेंट्स बच्चों को दवा देने में ऐसे कुछ गलतियां करते हैं

बच्चे जब बीमार हो जाते हैं। माता-पिता को बहुत चिंता हो जाती है कि उनके बच्चे को क्या हो गया। जैसे -बुखार ,खांसी, जुकाम,सिर दर्द ,उल्टी ,दस्त आदि बीमारियाँ हो जाने पर पेरेंट्स घबरा जाते हैं। कि बच्चा अभी तो ठीक था अचानक क्या हो गया। जिसमें वो कुछ सोच समझ नहीं पाते और खुद से उनका इलाज़ करना शुरू कर देते हैं। माता- पिता बच्चों के बीमार हो जाने पर कभी -कभी छोटी -छोटी गलतियां कर देते हैं। जो उनको बिलकुल नहीं करना चाहिए। बच्चे जब बीमार होते है तो उनको सबसे पहले डॉक्टर को दिखाये और डॉक्टर की परामर्श के अनुसार बच्चो को कितनी कब ,कौन सी दवा देनी है।वो देते रहे। आइये जानते हैं कुछ टिप्स जिससे  पेरेंट्स बच्चों को दवा देने में गलतियां करने से बच सकें –

1 –सही खुराक देना :- बच्चे के बीमार होने पर माता-पिता की जिम्मेदारी  होती है, कि बोतल पर लिखे गए इंस्ट्रक्शन्स के हिसाब से उनको दवा दें।चिकिसक के दिए सलाह के अनुसार बच्चों को दवा देनी चाहिए। फिर  अगर बच्चों को डॉक्टर के बताए गए dose के अनुसार आराम  नहीं मिल रहा है।  फ़ौरन डॉक्टर् से  मिलकर अपने बच्चे की सारी  परेशानियों को बता कर दवा देनी चाहिए।

2 –  दवा खुराक को दोहराना :- पेरेंट्स बच्चों को अगर बार -बार खांसी आ रही है तो हर बार खांसी सिरप पिला देते हैं। ताकि बच्चों की खांसी बंद हो सके। जिसके पेरेंट्स को चाहिए की डॉक्टर के बताये गए खुराक को ही बच्चों को दें। क्योंकि बच्चों में इतनी क्षमता नहीं होती कि वो कितनी भी दवा पिला दिया जाये। बच्चों को ज़्यादा दवा देने से उनको काफी दिक्कत हो सकता है। पेरेंट्स को चाहिए की बच्चों को कम से कम  दवा दें।

3 –दर्द से मिले आराम :- बच्चे  जब बाहर खेलते हैं या थक -हार कर  घर आते हैं, तो उनको अगर पैर में दर्द हो सिर दर्द आदि की शिकायत पेरेंट्स से होती है। जिसके लिए अक्सर पेरेंट्स बच्चों को पैन किलर दे देतें हैं , जो बिल्कुल नहीं करना चाहिए हर दर्द में बार -बार पैन किलर खाने से आपके बच्चो आगे चल कर काफी दिक्कतें हो सकती है। ऐसे में पेरेंट्स बच्चों को घरेलू नुस्खे अपना कर दर्द से निजात पा सकते  हैं। बच्चे का दर्द भी दूर हो जायेगा। बिना किसी मेडिसिन खाने से।

4 – सही मात्रा में दवा देना :- कभी -कभी  ऐसा होता है बच्चों को जो दवायें मीठी होती हैं उनको दिन में या रात में कई बार पी लेते है या खा लेतें हैं। पेरेंट्स इतना ध्यान भी नहीं दे पाते हैं कि उनका बच्चा कितनी बार दवा खा लिया।पेरेंट्स बच्चों को सही मात्रा में  दवा को बच्चों को दें। ताकि उनको बीमारी जल्दी से जल्दी ठीक हो सके और खुश रह सके।

 

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