मिनट भर में पहचानें नवजात शिशु में पीलिया के लक्षण को

नवजात शिशु में पीलिया की समस्या बेहद आम बात है जो जन्म के समय किसी न किसी बच्चे में जरूर होता है। इस दौरान, शिशु के शरीर और आँखों का रंग पीला हो जाता है। हालाँकि, शिशु में यह समस्या रक्त में बिलीरूबिन की अधिक मात्रा होने के कारण उत्पन्न होती है।

शिशु में कितने दिनों में जॉन्डिस का पता चलता है ?

पीलिया आमतौर पर शिशु के जन्म के पहले 5 दिनों के अंदर  होती है। ऐसे में, इस दौरान शिशु को डॉक्टर की निगरानी में अस्पताल में रखा जाता है। हालाँकि, कुछ बच्चों में बहुत ही हल्के तौर पर पीलिया के लक्षण दिखाई देते हैं, जो कि बिना समस्या पैदा किए एक से दो हफ्ते में खुद ब खुद ठीक हो जाता है। लेकिन, जब भी शिशु में पीलिया के लक्षण दिखाई दें तब आपको इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। क्योंकि, दुर्लभ मामलों में, यदि बिलीरुबिन का स्तर बहुत अधिक हो जाता है तब यह केर्निकेटरस नामक बीमारी को पैदा कर सकता है, जो सीधे तौर पर शिशु के मस्तिष्क को क्षति पहुंचाता है।

नवजात में पीलिया होने के क्या कारण हैं ?

नवाजत में पीलिया होने के निम्न कारण हैं, जो निचे दिए जा रहे हैं-

  • नवजात में जॉन्डिस की समस्या तब उत्पन्न होती है, जब उसके ब्लड में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ जाती है। बिलिरुबिन एक ऐसा केमिकल होता है, जो कि शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के सामान्य रूप से टूटने पर बनता है।

  • नवजात शिशु में बिलिरुबिन का स्तर ज्यादा होता है, क्योंकि उनके शरीर में अतिरिक्त आॅक्सीजन वहन करने वाली लाल रक्त कोशिकाएं होती हैं। लेकिन, नवजात शिशु का लीवर अभी पूरी तरह से परिपक्व नहीं हुआ होता है, इसलिए यह अतिरिक्त बिलिरुबीन को वहन नहीं कर पाते हैं।

  • दुर्लभ मामलों में, पीलिया अन्य चीजों के कारण हो सकती है, जैसे कि संक्रमण, बच्चे की पाचन तंत्र में समस्या, या फिर माँ और बच्चे के रक्त के प्रकार की समस्या के कारण।

नवजात में पीलिया होने के क्या लक्षण हैं ?

सामान्यतः जैसे ही शिशु में पीलिया की समस्या होती है ठीक वैसे ही शरीर, चेहरे और आँखों का रंग पीला दिखाई देने लगता है, जो कि इसका एक सबसे बड़ा और आम लक्षण माना जाता है, इसके अलावा भी इसके कई ऐसे लक्षण हैं जो सामान्य रूप से शिशु में  दिखाई देता है, जो निम्न हैं-

  • पूरे शरीर का पीला पड़ना

  • नाखून, हथेलियों या मसूढ़ों में पीलापन

  • शिशु का चिड़चिड़ा होना

  • नवजात का लगातार रोना

ऐसे में, इस तरह के लक्षण नज़र आते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करें ?

जैसे ही आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में कुछ भी अपने शिशु में नज़र आये  संपर्क करें। तब ऐसे में, डॉक्टर आपके शिशु का ब्लड टेस्ट करेंगे ताकि उसमें बिलिरुबीन की मात्रा का पता लगाया जाता है। इसके अलावा, आप तुरंत डॉक्टर को कॉल करें जब-

  • जब शिशु के जन्म के 24 घंटे के अंदर पीलिया हुआ हो।

  • जब शिशु के शरीर में पीलिया तेज़ी से फ़ैल रहा हो।

  • जब आपके शिशु को 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक बुखार हो।

  • जब शिशु का हेल्थ दिन ब दिन गिरता जा रहा हो।

  • जब शिशु के यूरिन का रंग गहरा हो रहा हो।

शिशु में पीलिया का उपचार कैसे किया जाता है ?

अधिकांश मामलों में, नवजात में पीलिया के उपचार की जरूरत नहीं पड़ती है। क्योंकि, हल्के तौर पर हुए पीलिया खुद ब खुद 1 से 2 हफ्ते में ठीक हो जाता है। इस दौरान, शिशु का शरीर अपने आप अधिक बिलीरुबिन से छुटकारा पाने में सक्षम होता है।

हालाँकि, कभी-कभी इस दौरान डॉक्टर शिशु को ब्रेस्टमिल्क और फार्मूला मिल्क लगातार पिलाने की सलाह देते हैं, ताकि मल के जरिए शिशु में  बिलीरुबिन  कम हो सके।

वहीँ जब शिशु में पीलिया का उच्च स्तर हो तब फोटोथैरेपी से इसका उपचार किया जाता है। फोटोथेरेपी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नवजात शिशु को फ्लोरोसेंट रोशनी में रखा जाता है। इससे शरीर से अतिरिक्त बिलिरुबिन टूटने लगता है।

इसके अलावा, कुछ दुर्लभ मामलों में बिलिरुबिन का स्तर खतरनाक उच्च स्तर पर पहुंच सकता है। ऐसी परिस्थिति होने पर शिशु को खून चढ़वाने की भी जरुरत पड़ सकती है। लेकिन, थोड़ा सा ध्यान रख कर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

आपकी बिंदु- एक दैनिक कॉलम है, जहाँ आपको हर मर्ज़ की दवा मिल सकती है। इसके लिए आप घरेलू नुस्खे, हेल्दी फ़ूड से लेकर तमाम सभी चीज़ों की जानकारियों और अपने सवाल इस ईमेल aapkihindieditor@zenparent.in पर भेज सकते हैं।

Feature Image Source: momjunction.com

loader