मालिश आपके और शिशु के लिए कई मायनों में है फायदेमंद

शिशु की मालिश करने की परंपरा बहुत पुरानी है और यह आपके और शिशु के लिए कई मायनों में फायदेमंद है। खासकर माँ के लिए यह किसी सुंदर अनुभव से कम नहीं है, जब वह अपने शिशु को मसाज करती हैं और उसके तरीके को सीखती हैं। शिशु की रोजाना मालिश, शिशु के प्रति अपने लाड़-प्यार और ममता को जाहिर करने का एक बढ़िया तरीका है। हालाँकि, कुछ भारतीय महिलाएं अपने बच्चे का मसाज जन्म के एक महीने बाद शुरू करती हैं। लेकिन वहीं डॉक्टरों का कहना है कि जन्म के बाद जल्द से जल्द शिशु को मसाज करना चाहिए, क्योंकि यह बेहद फायदेमंद माना जाता है। और वास्तव में, यह अच्छी सलाह है। यह एक सकारात्मक चीजें हैं जो आपके मालिश करने से आपके शिशु को शांत करने और उसे आरामदायक रखने में काफी मदद करती है।

अधिकांश भारतीय महिलाएं, जो पहली बार माँ बनती हैं वह अपने और शिशु के मसाज के लिए शुरुआत के कुछ महीनों के लिए एक मालिशवाली रखती हैं। जबकि वास्तव में, मालिश नवजात शिशु के साथ बांड बनाने का एक सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। इसके अलावा बेबी को मसाज करने  के कुछ भौतिक लाभ भी हैं, जिसमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक लाभ भी शामिल हैं।

अक्सर, भारत में शिशु की मालिश के लिए नारियल या तिल का तेल उपयोग किया जाता है। जिसे भारत के कुछ क्षेत्रों में एक मनगढ़ंत औषधीय कहानी के रूप में माना जाता है। लेकिन आज के बदलते परिवेश ने इसे मानने से इंकार कर दिया है। क्योंकि, नारियल तेल, तिल का तेल या जैतून के तेल को हिमालया बेबी मसाज आयल के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इसमें चिकित्सा के ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो बच्चे को संक्रमण, कीड़े के काटने और सूखी त्वचा से राहत दिलाने में मदद करता है।

इसके अलावा, बाल रोग , मेडिकल कॉलेज कोलकाता, के एक अध्ययन में यह बात सामने आई हैं कि, हिमालया बेबी मसाज ऑयल के जरिए बच्चे में होने वाले सूखी त्वचा (क्सेरोसिस), जो कि बहुत ही सामान है, उसका इलाज किया जा सकता है। परिणामस्वरूप, त्वचा के सूखेपन में कमी पाई गयी और साथ ही त्वचा में कोमलता और चमक देखने को मिला। इतना ही नहीं हिमालया बेबी मसाज आयल में यह भी देखा गया कि इसमें अश्वगंधा के तत्व मौजूद हैं, जो बच्चे के शरीर में तेजी से अवशोषित होता है, जिससे कि त्वचा प्राकृतिक रूप से मुलायम और चमकदार बनी रहती है।

आज के समय में, हमारा जीवन बहुत आसान हो गया है कि अब हम बड़े परिवारों में एक साथ नहीं रहते हैं। लेकिन यह सच है कि पुराने दिनों में वह सारे काम घर के बाकी सदस्य करते थे, जिसे हम और आप अकेले कर रहें है। पहले में महिलाएं अंदर से काफी मजबूत होती थी, की प्रसव के बाद भी खुद का काम अकेले करती थीं। लेकिन, आज के समय में आप खुद से ज्यादा अपने बच्चे के साथ बॉन्डिंग बनाना मायने रखता है। क्योंकि, बच्चे के पैदा  होते ही उसके साथ गहरा संबंध बनाना महत्व्पूर्ण होता है।

यहां पर मालिश के कुछ फायदे हैं, आप और आपके बच्चे के लिए, जो निम्न हैं-

बच्चे के लिए

  • आराम

  • बच्चे को प्यार महसूस कराने में मदद करता है।

  • बेहतर नींद को बढ़ावा देता है।

  • शरीर को जागरूक करता है।

  • प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देता है।

  • संवेदी उत्तेजना

  • त्वचा की हालत में सुधार करता है।

  • रक्त परिसंचरण (ब्लड सर्कुलेशन) में सुधार करता है।

  • पाचन में मदद करता है।

  • रेस्पिरेशन को बैलेंस करता है।

  • वेस्ट एलीमिननेशन में मदद करता है।

  • ऑक्सीटोसिन के उत्पादन को उत्तेजित  करता है। (ऑक्सीटोसिन एक ऐसा हार्मोन है जो मालिश के दौरान पुरुष और महिला दोनों में समान रूप से उत्पादित किया जाता है। जो एक दर्द रिलीवर के रूप में उपयोगी होता है।)

 

आपके (माँ) के लिए

  • यह पेरेंट्स और बच्चे के आत्मसम्मान के निर्माण में मदद करता है।

  • यह आपके बच्चे के बारे में जानने (उनकी जरूरतों और इच्छाओं ) में आपकी मदद करता है।

  • रिलैक्स पेरेंट्स

  • माँ अपने अपने बच्चे की देखभाल के लिए अधिक आरामदायक महसूस करती हैं।

  • पेरेंट्स अपने बच्चे के संकेतों और उसके प्रतिक्रिया को समझते हैं।

  • पेरेंट्स अपने बच्चे को शांत करना और उसके तकनीकों को जानते हैं।

  • एक सम्पूर्ण पोषण के लिए एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करता है ।

 

ऐसे में, शिशु की रोजाना मालिश, शिशु के प्रति अपने लाड़-प्यार और ममता को जाहिर करने का एक बढ़िया तरीका है। मालिश आपके शिशु को शांत करने और उसे आरामदायक रखने में काफी मदद करता है। साथ ही बच्चे को आपके करीब लाने का एक सबसे प्राकृतिक और सुखद तरीकों में से एक है।

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