माँ बातों-बातों में सिखा देती हैं जीने के ये 6 ढंग

माँ दुनिया के सबसे खूबसूरत शब्दों में से एक है, क्योंकि माँ के प्यार की कोई सीमा नहीं होती। इसलिए माँ और बच्चे का रिश्‍ता इस दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्‍तों में से एक है। लेकिन यह बात भी सच है कि वह जिंदगी के कई चैप्टर्स को सिखाने के लिए कभी प्यार का सहारा लेती हैं, तो कभी मार का। लेकिन इस बात की पूरी गारंटी होती है कि उससे बेहतरीन जिंदगी के पड़ावों को कोई दूसरा नहीं समझा सकता है।

हालंकि, कुछ ऐसी ही सीख हैं, जो बच्चों को उनके फ्यूचर में बहुत काम आती हैं, वह निम्न हैं-

  • केयर करना- यह बिल्कुल सच है कि माँ अपने बच्चों से ज्यादा शायद ही किसी से प्यार करती है। चाहे बच्चे कितने भी बड़े या शैतान क्यों न हो। क्योंकि, बचपन से लेकर बड़े होने तक माँ के केयरिंग नेचर में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं आता है। ऐसे में बच्चों को अपने माँ से फ्यूचर लाइफ के लिए बहुत ही जरूरी केयरिंग नेचर को सीखा जा सकता है। हालाँकि, यह सच है कि पेरेंट्स बनने के बाद यह नेचर खुद-ब-खुद डेवलप हो जाते हैं।   
  • प्यार करना- शायद प्यार जैसे सुंदर शब्द माँ के लिए बना है, क्योंकि एक माँ ही हैं जो सच्चे और बिना किसी मतलब के प्यार करती हैं। सच तो यह है कि वह अपने सभी बच्चों को एक जैसा प्यार करती हैं, और इसी प्यार की उम्मीद वो अपने बच्चों से भी रखती हैं। ऐसे में बच्चों को अपनी माँ से प्यार की सच्चाई और गहराई को जरूर सीखनी चाहिए, ताकि आगे उनके काम आ सके।
  • जिम्मेदारी- बच्चे के जन्म से लेकर उनके होश संभालने तक माँ हर वह एक काम को बखूबी निभाती हैं। इतना ही नहीं माँ के उपर बच्चे के खाने-पीने से लेकर उन्हें स्कूल तक छोड़ने की रिस्पॉन्सबिलिटी उनके ऊपर होती है। ऐसे में बच्चों कोअपनी माँ से जिंदगी के सबसे अहम सिख जिम्मेदारी को जरूर सीखनी चाहिए। क्योंकि, रिस्पॉन्सबिलिटी, कैसे निभाते हैं इसे मां से ज्यादा अच्छा और आसानी से कोई नहीं सीखा सकता।
  • अनुशासन का पालन करना- अपने से बड़ों और छोटे के साथ कैसे बात करनी है, इसकी सीख सबसे पहले घर में मौजूद माँ से ही मिलती है। उनकी हर कोशिश यही रहती है कि अपने बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाकर एक अच्छा इंसान बनाएं। ऐसे में बच्चों को  प्रोफेशनल से लेकर पर्सनल लाइफ तक में काम आने वाली इस सीख को माँ से जरूर सीखनी चाहिए।
  • गुस्से पर काबू रखना- जिंदगी के सबसे अहम सीख में से एक है गुस्से पर काबू पाना। क्योंकि, एक परिवार को बांधे रहने के लिए उन्हें अच्छी तरह से पता होता है कि क्या नजरअंदाज करना है और कब बोलना है। इतना ही नहीं, कई बार बच्चों के जवाब देने पर मां अक्सर सुनकर खामोश रह जाती हैं। ऐसे में इगो को साइड रखकर कैसे रिलेशनशिप को निभाते हैं इस बात को मां से बेहतर कोई नहीं समझा सकता।
  • भरोसा करना- हर रिश्ते की नीब भरोसे पर टिकी होती है, क्योंकि एक भरोसा ही होता है जो शादी के बाद नए घर से नए रिश्ते को जोड़ने का काम करता है। ऐसे में इसी भरोसे की चाहत अपने बच्चों और अपने आने वाली पीढ़ी से भी करती है।

मॉर्डर्न मोना- मदर लाइफस्टाइल!एक दैनिक कॉलम, जहाँ महिलाओं से संबंधित पूरी जानकारी दी गई है।  जैसे- स्वास्थ्य, फैशन, फिटनेस, बच्चों का रख-रखाव, मनोरंजन, सेक्स आदि की जानकारी के लिए आप अपने सवाल इस ईमेल aapkihindieditor@zenparent.in पर भेज सकते हैं।

 

 

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