लोहड़ी पर्व मनाने के पीछे मान्यताएं !

लोहड़ी हर साल मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व है, जो पंजाब में खासा प्रसिद्ध है। हालाँकि, यह पर्व न केवल पंजाब की शान है बल्कि यह हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिमी और जम्मू-कश्मीर में भी काफी उत्साह से मनाया जाता है। इस दौरान महिलाएं आग के चारो ओर परिक्रमा करके आग में रेवड़ी डालती हैं वहीं लड़के भांगड़ा पाते हैं। इसके अलावा, भी कुछ बातें हैं जो लोहड़ी पर्व मनाने के पीछे जुड़ी हुई हैं-

आपसी भाईचारे का पर्व

इस दिन लोग गिले-शिकवे को भूला कर एक-दूसरे के साथ भांगड़ा करते हैं, और महिलाएं जले हुए आग के चारो ओर रेवड़ी और मूंगफली डालती हैं। साथ ही ढोल की थाप पर नाचती-गाती भी हैं।  

पारंपरिक मान्यताएं

इसके अलावा, इसके मनाने के पीछे एक वजह यह भी है कि यह मकर संक्राति से ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है और साथ ही पारंपरिक तौर पर लोहड़ी फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा एक विशेष त्यौहार होता है। .

दुल्ला भट्टी की मान्यताएं

लोहड़ी को लोग दुल्ला भट्टी के नाम से भी मनाते हैं, क्योंकि दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उस समय संदल बार की जगह पर लड़कियों को गुलामी के लिए बलपूर्वक अमीर लोगों को बेच जाता था जिसे दुल्ला भट्टी ने एक योजना के तहत लड़कियों को न ही मुक्त करवाया बल्कि उनकी शादी हिन्दू लडकों से करवाई और उनकी शादी की सभी व्यवस्थाएं भी करवाई। इतना ही नहीं, लोहड़ी के सभी गाने दुल्ला भट्टी से ही जुड़े हैं तथा यह भी कह सकते हैं कि लोहड़ी के गानों का केंद्र बिंदु दुल्ला भट्टी को ही बनाया जाता है।  

ऐसे में इस बार लोहड़ी 13 जनवरी शुक्रवार को पूरे उत्साह के साथ मनाया जायेगा, इसलिए हमारी तरफ से आप सभी को लोहड़ी की ढ़ेर सारी शुभकामनाएं।  

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