क्यों जरूरी है दूसरा बच्चा ?

जब मेरी शादी हुई मैं बहुत खुश थी। शादी के पांच साल बीत गए लेकिन कोई बच्चा नहीं हुआ मुझे। क्योंकि मैं तब तक बच्चा प्लान ही कर पायी थी कि मुझे कब तक बच्चा करना चाहिए। मेरा वजन बढ़ता रहा। ऐसे में लोगों का तरह -तरह के सवाल थे कि अभी तक कोई बच्चा क्यों नहीं किया सिर्फ वजन ही बढ़ रहा है। ऐसे में किसी को ये समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्यों नहीं बच्चा प्लान कर रही हूँ। क्या कोई अपने मन के हिसाब से बच्चा नहीं प्लान कर सकता चाहे वो शादी के  2 साल बाद हो या पांच साल बाद। लेकिन जब लोगों को ये पता चला कि मैं प्रेग्नेंट हूँ तो लोग बहुत खुश हुए और ढेरों बधाईयां देने लगे  और यहाँ तक कि लोगों का ये सवाल भी था कि  कैसा महसूस कर रही हो ? लड़का चाहिए या लड़की  चाहिए जैसे सवाल करना शुरू कर दिया लोगों ने। बच्चा हो जाने के बाद कुछ समय बाद जब हमने दूसरा बेबी प्लान किया तो किया तो लोगों का कमेंट कुछ सही नहीं था मेरे दूसरे बच्चे के प्रति कि क्या कोई इस ज़माने में दो बच्चे पैदा करता है ऐसा कह कर लोग हंसते  और मज़ाक उड़ाते थे। फिर मैं बुरा नहीं मानती थी क्यों मैं छोटे भाई के साथ बड़ी हुई थी मेरे अंकल आंटी को भी दो बच्चे थे इसीलिए मैंने भी प्लान किया कि मेरे भी दो बच्चे होगे जिससे मेरे दोनों बच्चों को अच्छी परिवरिश और कभी अकेलापन न लगे।

दो बच्चे होने से बच्चों को किसी और बच्चे के साथ खेलना और अप बचपन किस तरह से एन्जॉय करें इसके लिए कोई दिक्क्त नहीं होती कि कोई उसके साथ खेलने वाला/वाली नहीं है। सिबलिंग के साथ बच्चों का अच्छा बचपन गुजरता है।

 

दो बच्चों का केयर

बच्चों के साथ अधिक समय बिताना :- पेरेंट्स के लिए दोनों बच्चों में कौन उनका फेवरेट है जैसी कोई भावना नहीं होता है लेकिन बच्चों के अंदर ये भावना जरूर होता है कि पेरेंट्स को लड़के और लड़की में कौन ज़्यादा प्यारा है। फिर भी पेरेंट्स को अगर दो बच्चे हैं तो अधिक समय बच्चों के साथ बिताने को मिलता है। दोनों बच्चों के साथ अधिक समय कब बीत जाता है ये भी नहीं चलता है।

 

अच्छी बॉन्डिंग बच्चों के साथ :-  पेरेंट्स खासतौर से पिता बच्चों की केयर में कम से कम समय निकाल पाते हैं। लेकिन जब दो बच्चे बच्चे होते हैं तो उनको समय मिल जाता है बच्चों की देख -भल करने करने के लिए ऐसे में पिता और बच्चों की बीच अच्छा बॉन्डिंग होता है।

अकेले चलना :– माँ बच्चों को अकेले नहीं छोड़ सकती कहीं क्योंकि उनको हमेशा ये दर लगा रहता है बच्चा अकेला है अगर कुछ हो गया तो कौन संभालेगा लेकिन जब दो बच्चे होते हैं तो छोटे बच्चे को आराम से बड़े बच्चे के साथ छोड़ सकती हैं।

 

जब कोई खिलौना न हो खेलने के लिए :- बच्चे के पास यदि किसी कारण बीएस खिलौना न हो तो माँ दोनों बच्चों के साथ खुद को व्यस्त रख कर कोई भी खेल, खेल सकती हैं इसे बच्चे को भी खूब मज़ा आएगा और माँ भी अपना समय बच्चों के साथ बिता सकेंगी।

आत्मविश्वास के साथ पेरेंट्स अपनी सफर को एन्जॉय करें :- पैरेंट्स अपनी इस यात्रा को बहुत ही ख़ुशी से एन्जॉय करें। जिससे उनको प्रेगनेंसी में कोई दिक्कत नहीं होती है ऐसे में बच्चे की केयर और उसके लिए क्या बेहतर है इन सभी चीजों का खास ख्याल रखते हैं। बिना किसी चीज की चिंता किये हुए हर पल को अच्छे से एन्जॉय कर सकेंगे।

दूसरे बच्चे की देख -रख में कोई दिक्क्त नहीं होती है क्योंकि ापहले बच्चे में क्या -क्या परेशानी हुई होती है इसका पूरा ध्यान रहता है इसीलिए दूसरे बच्चे को किस तरह से पालना है और किस तरह से उसको फीड आदि करना इसका अनुभव् पहले बच्चे के हो जाने के बाद हो जाता है।

 

जब एक बच्चा हो :

  • बच्चा अगर अकेला है तो उसे किसी और के बारे में कुछ नहीं सोचना होता है जैसे बड़ा भाई या छोटी बहन को क्या चाहिए क्या नहीं।

  • बच्चे को अगर टीवी शो देखना है तो खुद का मन पसंद शो देखता रहेगा उसे उसका छोटा भाई -बहन टोकने वाले नहीं होंगें।

  • बच्चे को क्या -क्या पसंद है इसका विशेष मतलब नहीं होता है क्योंकि अगर दो बच्चे होते है तो उन दोनों के पसंद के फ़ूड आइटम्स आदि बनने पड़ते हैं।

 

जब बात हो दो बच्चों की

  • जब दो बच्चे होते हैं तो बच्चों के साथ अच्छा वक़्त गुजरता हैं।

  • दो बच्चे होने से यदि माँ को कहीं जाना हो तो बड़े बच्चे के पासछोटे को संभालने के लिए छोड़ सकती हैं

  • दो बच्चे होने से अगल -अलग खेल और प्ले टॉयज खरीदने में काफी ख़ुशी होती है।

  • दो बच्चों से घरों में काफी लोगों को चहल -पहल बना रहता है।

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